Ravi ki duniya

Ravi ki duniya

Friday, February 20, 2026

व्यंग्य: तू प्यारी तेरा कुत्ता प्यारा

 

                                     


 

                                  

अंग्रेज़ी में एक कहावत है लव मी लव माई डॉग बोले तो अगर हमको प्यार करता है तो हमारे कुत्ते को भी प्यार करने को मांगता है। इसी का हिन्दी संस्करण है:


                        पेड़ प्यारा, पेड़ का पत्ता प्यारा            

                        लैला तू प्यारी तेरा कुत्ता प्यारा



एक सूबे में जब शादी की पार्टी (बारात) वधू के घर पहुंची तो वधू पक्ष ने ऐहितियातन कुत्ते को 'लीश' से बांध दिया ताकि वह इतने सारे लोगों का हुजूम देख विचलित न हो जाये और बारातियों को परेशान न करे। कुत्ता भाईसाब को सब मंजूर था मगर इस तरह 'लीश' से एक जगह बांध देना कतई मंजूर नहीं था। खासकर जब उसे यह लग गया कि यह पनिशमेंट के तौर पर उसको बांधा गया है। यह तो वैसे ही है जैसे कोई वी. आई. पी. मूवमेंट हो तो हिस्ट्री शीटर्स को पुलिस पकड़ कर हवालात में डाल देती है। 


कुत्ते ने ये ज़ुल्म खामोशी से नहीं सहा बल्कि उसने विरोधस्वरूप वही किया जो सभी कुत्ते ऐसी हालत में करते। अर्थात अनवरत भौंक भौंक कर वह अपना विरोध रजिस्टर करता रहा। जब कुछ रस्में रह गईं तो कुत्ते महोदय के सब्र का दामन छूटने लगा। उनसे पहले बारातियों में से कुछ लोगों के सब्र का बांध टूट गया और उन्होने बेचारे 'लीश' से बंधे कुत्ते की पिटाई कर दी। यह सब वधू से देखा न गया। सही भी है। उनके घर का तो वो सदस्य जैसा रहा होगा। हो सकता है। वधू का प्रिय हो। इस पर कहा-सुनी शुरु हो गयी। अब वर पक्ष कुत्ते के साथ हुई इस मारपीट को सही ठहराने लगे। बोले तो माफी- वाफ़ी मांगना दूर वो तो पिटाई को जस्टीफ़ाई करने लग पड़े। 


यह देख-सुन कर वधू पक्ष के कुछ लोगों का क्रोध उबाले मारने लगा। बस फिर क्या था वधू पक्ष के लोगों ने उन लोगों को कूट दिया जिन्होंने प्यारे टाॅमी को मारा था। पीछे से टाॅमी और एन्करेज कर रहा था अपनी भौं भौं से। कुत्ते के कूटने वालों की ऐसी कुटाई के बाद वातावरण कुछ भारी भारी हो गया। वधू ने एक बात सोची कि यदि ये पार्टी इतनी इंसेंसिटिव है, इतने हृदयहीन हैं तो आगे ऐसे लोगों से निबाह कैसे होगा। उसने तुरंत तभी के तभी ऐलान कर दिया कि वह यह शादी ही नहीं करेगी। और वर पक्ष को यह बात बता कर जाने के लिए कह दिया गया। अब वे सॉरी सॉरी करते रहे, पर वधू ने अपना मन बना लिया था। नो रिव्यू । कहते हैं न सीधे जाकर काट ही लिया। असल में दुनिया दो भाग में विभाजित है एक 'डॉग लवर्स' और दूसरे 'डॉग हेटर्स'। अब डॉग लवर्स और डॉग हेटर्स में कैसे जीवन भर का बंधन बना लिया जाये। वैसे वधू यदि विवाह कर लेती और उसके बाद जो ये मारपीट करने वाले लोग थे उनको देख लेती। और उनकी ऐसी खबर लेती कि कुत्ता बना कर ही छोड़ती। यह सब देख दूल्हा बेचारा तो जितने कहो उतने कुत्ते पाल लेता/गोद ले लेता। मैं एक परिवार को जानता हूँ जहां बेटा एक कुत्ते को पालना चाहता था, मगर माता-पिता सब मना करते रहे। कारण कि वे डॉग लवर्स नहीं बल्कि डॉग हेटर्स थे। तब बेटे को कुछ कंडीशन के साथ अनुमति मिली कि कुत्ता बाहर आँगन में रहेगा। घर के अंदर प्रवेश नहीं करेगा। थोड़े दिन बाद यह हुआ की वह घर के अंदर आ सकता है मगर माता जी के कमरे में नहीं घुसेगा। लास्ट रिपोर्ट मिलने तक यह खबर ये थी कि वह 'मम्मी' के साथ उनके बैड पर ही सोता है।

व्यंग्य : कुत्ता पूर्णतः भारतीय है

 

                                  

 

कुत्ते लोग आजकल फुल-फुल न्यूज़ में हैं। कभी वे काटते हैं, कभी वे डराते हैं। कभी सुप्रीम कोर्ट उनके केस पर सुनवाई करती नज़र आती है। कुत्तों के नाम से देश में न जाने कितने एन.जी.ओ. चल रहे हैं। कुत्तों के क्लीनिक चल रहे हैं। कुत्तों की दवा, कुत्तों के इंजेक्शन कितने महंगे-महंगे मिलते हैं। कुत्ता-लवर का कुत्ता जब बीमार होता है तो मालिक की हालत देखने लायक होती है। रूआँसा हो बताते हैं "ये कितना सैड सैड फील कर रहा है। खाना नहीं खा रहा है। पूरी रात चिल्लाता रहा है।"

 

भारत मंडपम में कुत्ते को लेकर कोई कंट्रोवर्सी हुई बताते हैं। इसकी कोई ज़रूरत ही नहीं थी। कुत्ता 100 % भारतीय पशु है। हमारी पौराणिक कथाएँ कुत्तों के वर्णन से भरी पड़ी हैं। क्या  कोई भी देश ऐसा कोई ऐसा दावा कर सकता है ? हरगिज़ नहीं। देखिये युधिस्टरअपने साथ कुत्ते को भी स्वर्ग में साथ ले जाने की ज़िद पर अड़ गए थे। कुत्ते के चलते उन्होने स्वर्ग ठुकरा दिया था और शर्त रख दी थी या तो ये कुत्ता मेरे साथ स्वर्ग भोगेगा अन्यथा मुझे स्वर्ग भी मंजूर नहीं। क्या किसी देश के पास है ऐसा या इससे पुराना कोई उद्धरण ?

 

कुत्ते की पूंछ में लाइट लगा देने से या उसके सिर पर कैमरा लगा देने से वह कुत्ता विदेशी नहीं हो जाता। क्या कोट-टाई पहनने से हिंदुस्तानी जो है सो अंग्रेज़ नहीं हो जाता। वह रहता इंडियन ही है। उसकी आदतों और मैनरिज़्म देखें, आपको यकीन आ जाएगा। हमारे यहाँ कुत्तों का ज़िक्र दोहों में भी मिलता है। याद है “...श्वान निद्रा....” इसमें छात्रों से आव्हान किया गया है कि पढ़ने वाले की नींद कुत्ते की नींद के माफिक होनी चाहिए।

 

हमारे सामाजिक जीवन में कुत्तों को लेकर पहले भी बहुत सारी कहावतें, मुहावरे और लोकोक्तियाँ हैं। धोबी का कुत्ता घर का ना घाट का, कुत्ते सी ज़िंदगी जीना, कुत्ते की तरह भौंकना। कुत्ते की तरह पीछे पड़ जाना। कुत्ते को घी नहीं पचता। राम जी का कुत्ता। कुत्ता बना कर रखा हुआ है। हमारे यहां स्वामीभक्त कुत्ते भरे पड़े हैं। हमने कुत्तों को पूरी-पूरी आज़ादी दे कर रखी है। जहां मर्ज़ी घुस जाओ। जिसे मर्ज़ी काटो। हाल ही में दिल्ली के एक स्टेडियम में देसी कुत्तों ने विदेशी कोचों को काट लिया।

 

कुत्ते का देश बदल जाने से कुत्ता विदेशी नहीं हो जाता। वह रहेगा भारतीय ही। अपनी आत्मा से भी और अपनी आदतों से भी। आपने कुत्तों के पार्लर नहीं देखे हैं। कुत्तों के शैम्पू, कुत्तों की क्रीम, टाॅनिक्स, कुत्ता ब्रीडिंग, कुत्तों के फ्लोरेसेंट काॅलर, कुत्तों का विशिष्ट भोजन, हड्डी, पेडिग्री, जी.पी.एस. कुत्तों के जूते, कुत्तों के सोफ़े, बैड, पता नहीं और क्या क्या। आप कह रहे हो कुत्ता विदेशी है। कुत्ता हम भारतीयों का है। अभी इन्सानों का एस.आई.आर. और सिटीजनशिप का मामला तो किसी सिरे पहुंचा नहीं अब आपने उसमें कुत्ता भी जोड़ दिया। कुत्ते को आप कहीं भी ले जाओ चाहे जापान चाहे चीन वह रहेगा मूलतः भारतीय। मेरा सरकार से अनुरोध है कि कुत्ते को एक अध्यादेश के द्वारा राष्ट्रीय पशु घोषित कर दिया जाये, या फिर डिप्टी राष्ट्रीय पशु घोषित करा दो। अगर वह भी मुमक़िन ना हो तो कमसेकम दो-चार राज्यों  का राज्य-पशु ही घोषित करा दो। इससे हमारा कुत्ता हमारे पास ही रहेगा, दृष्टांत रहेगा और कुत्ते को भी कुत्ते सी ज़िंदगी से थोड़ा रिलीफ़ मिलेगा।

 

 

हम कुत्ते एक चॉल के....  संग-संग डोलें... जी संग-संग डोलें !

 

व्यंग्य: ज़िंदगी ए.आई. है इसमें सच है क्या और ...

 


 

                    देखिये जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखि तैसी’। कोई बता रहा है ए.आई.और कुछ नहीं बस एक लोहे का कुत्ता है और नमस्ते कहते जाना है। यह कैसा जादू है? कभी यह अमेरिका-इंडिया हो जाता है। कभी ये आई (मराठी में माता) हो जाता है। वो गीत है ना "कभी तू छलिया लगता है कभी तू..." हमने एक बहुत बड़ा आयोजन भारत मंडपम  (पूर्व प्रगति मैदान) में किया जहां की अव्यवस्था की बातें सब करने लगे। क्यों कि प्रतिभागियों का सामान भी चुरा लिया गया। अब क्या हम ए.आई. के चलते अपनी चोरी की मूल वृत्ति को भी छोड़ दें।  देखिये चोरी करने में ए.आई. काम नहीं आती इसमें तो ओ. आई. चाहिए बोले तो ओरिजनल इंटेलिजेन्स। कहते हैं ए.आई. के लिए बहुत ओ.आई.चाहिए। हमारे देश का ए.आई. के फील्ड में पौने दो सौ मुल्क़ों में 72वां स्थान है। अभी तक हमारा मौलिक योगदान ए.आई. के क्षेत्र में ज़ीरो है। यूं कहने वाले कह सकते हैं जब अमेरिका और चीन कर ही रहे हैं तो भला हमें क्या पड़ी है अपने पैसे खर्च करने की?

 

ए.आई. छात्र के लिये एक स्कूल के विद्यार्थी के लिए ए.आई. और कुछ नहीं वो कुंजी है, वो गाइड है वो हैल्पफुल टीचर है- माँ समान, पिता समान। ए.आई. ऑलवेज इंटेलिजेंट।  अतः आप समझ सकते हैं कि एक छात्र के जीवन में ए.आई. का कितना महत्व है। वो इसी बात के लिए तरसता रहता है कि कोई उसे ए.आई. ऑलवेज इंटेलिजेंट कहे। बार बार कहे, कहता ही रहे।

 

ए.आई. प्रेमी जोड़े के लिए तो जैसे ऑक्सिजन का काम करती है। आप समझे नहीं ऑलवेज इंटीमेट चाहे मॉल में, थियेटर में, झाड़ के पीछे, पुराने क़िले में, ओयओ में। हम न होंगे जुदा.. सदा रहेंगे संग साथ। नहीं तो याद है ना नीला ड्रम

 

 

ए.आई. नेता के लिए गंगाजल की तरह है। हर नेता की चाहत होती है ब्लॉक लेवल से बढ़ कर डिस्ट्रिक लेवल का हो जाये और फिर एक दिन ए.आई. बोले तो ऑल इंडिया हो जाये। सब उसे पहचानें यहाँ तक कि वह अपने दल का स्टार प्रचारक बने ताकि हेलीकाॅप्टर से सूबा- सूबा घूम सके और इससे अपने सूबे में भी स्टेट्स बढ़ता है। अतः नेता को ए.आई. चाहिए, उसकी 'माई एम्बीशन इन लाइफ' हर नेता को चाहिये, जल्द से जल्द चाहिए।

 

ए.आई. बिजनिसमैन के लिए अब देखिये व्यापारी/ सौदागर शुरू से ही इस सरज़मीं पर अपनी कारस्तानी करते आए हैं। वे चाहते हैं कि वे खुद और उनकी आने वाली उद्यमशील संतानें ए.आई. जैसे बनें। उनका रोल माॅडल ही ए.आई. है। नहीं समझे? भाई साहब ए.आई. बोले तो अडानी इंटेलिजेंस, अंबानी इंटेलिजेंस, आकाश इंटेलिजेंस, आदित्य (बिड़ला) इंटेलिजेंस,आदि (गोदरेज) इंटेलिजेंस

 

ए.आई. फिल्मवालों के लिए कहाँ से शुरू करें। ऐसे- ऐसे हिदायतकार (डाइरेक्टर) हुए हैं जिन्होंने जो फिल्म बनाई। ए.आई. से ही बनाई। सब कुछ नकली। क्या मेकअप, क्या इमारतों के अग्र भाग, क्या रेलवे स्टेशन, क्या गोली-बंदूक। सब आर्टिफ़िशियल है। क्या प्यार क्या मुहब्बत। क्या रिश्ते-नाते, क्या आंधी-तूफान, क्या मृत्यु और क्या अंतिम संस्कार।  भारत में फिल्मों में ए.आई. (अर्देशर ईरानी), अरुणा ईरानी, ए.आई. (आलम-आरा इंडिया) की पहली बोलती फिल्म, ए.आई (ए क्लास इंदरसभा) जिसमें 20-30 नहीं, पूरे 71 गाने थे और ये रिकॉर्ड आजतक बरकरार है। इस सारी रेल-पेल में एक ए. आई. जिसे आपने नहीं भूलना वह है ए से आसिफ साब की मुग़ले आज़म जिसमें क्या अकबर, क्या अनारकली सभी तो 'आई' से इंडियन रहे और वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया। इसमें उनकी शरीक-ए-हयात अख्तरी (इंडियन) यूं कहने को फिल्म का तो आविष्कार ही ए.आई. ने किया है क्या मिस्टर आगस्त्य लुमियर (इंटरनेशनल) क्या उनके पिता एंटोनिएट लुमियर (इन्टरनेशनल) वे फ्रांस के थे और उनका असिस्टेंट फिल्मों को प्रदर्शन के लिये आस्ट्रेलिया ले जा रहा था जब उसने मुंबई में रुक कर यह जादू का पिटारा वाटसन होटल में खोल दिया था। यह योगदान हमने नहीं भुलाना है।

 

ए.आई. पी एच डी स्कॉलर के लिए: पी एच डी स्कॉलर का तो सर्वस्व ही ए.आई. है। वह चाहे 'घोस्ट राइटर' के रूप में हो या 'कट एंड पेस्ट' के रूप में। आजकल बनी बनाई थीसिस बाज़ार में आम मिलती है। और क्या बच्चे की जान लोगे। इतनी ए.आई. तो ए.आई. को भी नहीं पता होगी कि उसके नाम से क्या-क्या चल रेला है। 

 

ए.आई. बेरोजगार के लिए: उसके जीवन में तो ए. आई. ही ए.आई. है। पहले ए से एड देखो फिर आई से इंटेलिजेंस लगानी है कि इसका पेपर कैसे लीक कराया जाये। कैसे इसका साॅल्वर अरेंज किया जाये इत्यादि इत्यादि। लॉकेट में, शर्ट में या चप्पल में ब्लू टूथ लगवाया जाये। कितना 'टेक्निकल सैवी' ऑलरेडी बन गए हैं सब मेरे भारत महान में।

 

ए.आई. अग्निवीर के लिए: देखो भैया आपके लिए तो ए.आई. ये ही है कि कैसे उस 25% में आना है जिनको रेगुलर किया जाना है। '' से अग्निवीर की 'आई' से इंटेलिजेंस इसी में है। किसे मक्खन लगाना है और कितना ? 

 

 ए.आई. एपस्टीन वाला: भाई ! जो भी नाम आए जो भी फोटो आए अपुन को बस एक ही बात कहनी है- ये मैं हूं ही नहीं, सब ए.आई. से बना है। बस जास्ती कुछ बोलने का ही नहीं। कराते रहो फैक्ट चैक। मैं '' से एपस्टीन के 'आई' से आइलेंड गया ही नहीं।

 

 केस क्लोज़!

 

Monday, February 2, 2026

मरना तू, मेरा जीना तू

 

बरसों पहले बिछुड़ने के बाद कैसे मिले हम आज

तुम क्या जानो ये राज़           

तेरी गली की दिशा में सिजदा कर 

हमने हरदम दुआ की तुझसे मिलने की

मेरी मक्का तू, मेरा मदीना तू

मेरा मरना तू, मेरा जीना तू

देख तेरा इश्क़ किस मुकाम पर ले आया मुझे   

फर्क ही मिट गया जीने-मरने का

मेरी दुआ बेअसर साबित न हुई

मेरा अपना सलीका था दुआ का  

Monday, January 5, 2026

व्यंग्य : रेट कार्ड रिश्वत का

  

 

मेरे भारत महान के एक महान सूबे में एक दस साला सर्विस के प्रशासनिक अधिकारी ने लॉ एंड ऑर्डर स्थापित करते हुए उन्होंने अपने ऑफिस  की कार्यप्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन किया है। बल्कि सुधार किया है और व्यवस्था स्थापित की है। जिसके लिए यह प्रशासनिक अधिकारी को दिल से सलाम है। किसी भी ऑफिस में अथवा संगठन में अनिश्चितता एक बड़ी बीमारी है। इस भाई ने वही प्रणाली ठीक की है। दुरुस्त कर के चाक-चौबन्द कर दी है। उन्हें जो भी बड़े से बड़ा पुरस्कार हो वह उसका हक़दार है। मुझे बहुत दुख: हुआ जब पता चला कि इनाम-इकराम तो भाड़-चूल्हे में गया अगले के छापा मार के घर-ऑफिस से धन-संपति ज़ब्त कर ली। गिरफ्तार अलग कर लिया है।

 

अब कोई अधिकारी क्यों किसी व्यवस्था को सुधारने की सोचेगा। भाईसाब ने जब जॉइन करते ही देखा कि सुविधा शुल्क (रिश्वत) का कोई ठीक ही नहीं है किसी से कुछ राशि, किसी से कुछ राशि। कोई रिलायबिलिटी ही नहीं। पता नहीं अधिकारी अथवा बाबू या कोई और कारिंदा कितना मुंह फाड़ ले। इससे ऑफिस की साख गिरती है। ऑफिसर की साख गिरती है। जिसे रोकना बहुत ज़रूरी था। रियाया का 'फेथ' सरकार के इक़बाल में बने रहना चाहिए। यह भी तो अधिकारियों का ही काम है। बल्कि मैं तो कहूँगा यह उनकी सर्वोच्च ड्यूटी है। बस वही काम तो ये बेचारा अधिकारी कर रहा था। उसने सोचा भी न होगा कि उसके इतने अच्छे काम का यह सिला मिलेगा।

 

अधिकारी महोदय ने रात-दिन जाग-जाग कर पूरे सिस्टम को स्टडी किया और इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि ये सब इसलिए है कि रेट-कार्ड फिक्स नहीं है। बस फिर क्या था उन्होंने आनन-फानन में एक रेट-लिस्ट बनाई और स्टाफ का पूरा-पूरा ध्यान रखा गया। आखिर ऑफिस का काम एक टीम वर्क है। अतः टीम के सभी सदस्यों का ध्यान रखना होता है। आप इस रेट-लिस्ट पर एक नज़र डालें:

 

           सुविधा शुल्क (रिश्वत) का रेट (कृषि भूमि को ग़ैर कृषि में कन्वर्ट करने का) दस रुपये प्रति वर्ग मीटर रहेगा (ऑफ कोर्स ! अगले रिविज़न तक)  इस प्रकार से प्राप्त राशि का डिस्ट्रीब्यूशन इस प्रकार रहेगा (अगले आदेश तक):

 

 

1.       कलैक्टर (वे स्वयं)  50%                 

2.       अपर कलैक्टर       25%                 

3.       मामलतदार           10%                       

4.       उप-मामलतदार     10%                    

5.       लिपिक                 05%                                 

 

 

एजेंसी प्रथम द्य्ष्ट्या इस मामले में वित्तीय आंकलन लगभग 1500 करोड़ का बताया गया है। देखिये मेरे भारत महान में ऐसे लाखों नहीं तो हज़ारों हज़ार ऑफिस हैं। सोचो ! कितना राजस्व इस अधिकारी की वजह से उत्पन्न हो रहा था। अब देखो तो ये समस्त राजस्व भारत में ही रहने वाला है। यह हमारा सरमाया है। दो-चार दिन में यह अधिकारी पुनः अपनी फुल फाॅर्म में देश हित में राजस्व बढ़ाने में अपने  तन-मन-धन से सहयोग करने में जुट जाएगा।

 

शर्म हमको मगर नहीं आती।

Wednesday, December 31, 2025

satire: Indian Politicians' reaction to Epstein file Expose'-- Cold Casual Calculated!!

 

 

1. It is NOT me.

2. This is nothing but Photoshop. The head resembles me, torso is certainly not mine.

3. This is the opposition's stunt.

4. Foreign Hand is there in this. Why just the hand? The legs, the knees all are theirs.

5. This is a conspiracy to weaken and defame India

6. This is New India, India's progress is sore to the eyes of other countries, so this is their Plan I mean conspiracy.

7. I have never been to the United States.

8. I had gone to America, but I did not go to any island.

9. I don't know any Jefferson, only one Jefferson I had read about, but he died a long time ago. Thomas Jefferson.

10. Who is this, Lolita? These tapes are definitely tampered. My wife's name is Lalita.

11. Bro! I do not even have a passport

12. This is the dirty trick of Congress.

13. Our rapid progress is not taken kindly by America. Its nothing but jealousy.

14. I take Aspirin sometimes, but what is this Episteen? Is it a new medicine for headache in the market?

  15. No comments

  16. Elections are coming, so it is the mischief created by my rivals, but you see! they will be humbled.

17. No heat to the glass

18. Lord Rama was also accused, but he had the last laugh. All this is an illusion of demonic powers, but like every time, I will come back unblemished from this circle.

19. I have full faith in the judiciary.

20. If the high command says, I will gladly resign immediately. I have no greed for a chair. For me, the honour of my party is supreme.

21. I am a disciplined soldier of my party.

22. Sexual attraction is a natural instinct; it should not be made public in a cultured country like ours.

23. We have filed a case in the Supreme Court. Because the case is 'sub-judice', it will not be possible to make a statement.

24. This is a body double, not me.

25. I don't know English, how could it be me?

26. I was busy in my constituency during those days, how could I simultaneously be present at two places. Think before speaking.

27. Are you a traitor?

28. Are you a congressman? if not, why are you asking such questions? How could a 'Sanatani' even imagine such a scandalous thing?

29. I will do anything for my motherland when the threat of China was increasing. I once went to the US to explain India's perspective to the World. I knew that I was being recorded, but I kept the country's interest paramount.

30. Children are of purest mind. It is the way of welcoming guests all over the world that children give bouquets. They sing welcome songs. Apart from this, if there is anything else, then it is all the wonder of AI technology. You know how far America is in terms of technology.

31. I am not that good in English language. I had a headache, I asked them for a tablet of Aspirin, till date i fail to understand why they brought this man whose name was similar to Aspirin. I thought he was a Dr. and has prescribed some therapy.

Monday, December 29, 2025

स्किट : स्वयंवर डॉली का

 


 

 

( _प्रस्तुत है सन् 2026 के एक स्वयंवर का दृश्य। स्थान है  एक सांभ्रांत सोसायटी,हरे-हरे जंगलों की हरियाली के बीच आपको तो पता है सावन के अंधे को सब हरा हरा ही दिखता है। सभी पात्र,अपात्र, कुपात्र व्यक्ति अपने आपको  योग्यतम/उपर्युक्त लाइफ पार्टनर बता रहे हैं। कुछ तो कह रहे हैं कि लाइफ पार्टनर ना सही लिव-इन-पार्टनर ही बना लो।ये जान तो वैसे भी जानी है हम एन.सी.आर. के जाँबाज हैं । प्रदूषण से मरना है या डॉली के प्यार रूपी आभूषण से ? लाइफ आपकी .... चाॅइस आपकी_ )

 

[ _दृश्य: नायिका आधुनिक वस्त्रों में पर्स हिलाती-डुलाती चहलकदमी कर रही है। ग्रीनवुड का नायक नंबर वन का प्रवेश_ ]

 

नायक: ( _टाई पहने/ लैपटॉप का बैग उठाए_ )  हाय ! हम शायद पहले मिले हैं ? आप जानी-पहचानी लगती हैं ? मैं ग्रीनवुड में रहता हूँ। मैं कॉर्पोरेट जगत का हैड हौंचो हूं। मैं अनममैरिड हूँ क्या आप मुझे अपना लाइफ पार्टनर बनाएँगी?

 

नायिका:   कुछ अपने बारे में बताइये ? आपने तो सीधे डंडा सा मार दिया!

 

नायक1:   जी हमें कॉर्पोरेट वर्ल्ड में टाइम मैनेजमेंट सिखाया जाता है। बायोमेट्रिक के चलते अब तो एक एक मिनट कीमती है। देखो मैं तुम्हें वर्ल्ड टूर पर साल में दो-तीन बार ले जाया करूंगा। मैंने बहुत से फ्रीकुएंट ट्रेवलर पॉइंट जोड़ लिए हैं। खूब शॉपिंग कराऊंगा। यहाँ तक कि मेरी कंपनी के प्रोडक्ट भी तुम्हें मेक्सिमम डिस्काउंट पर दिलाया करूंगा। वीकेंड पर हम दिल्ली जाकर भी घूम सकते हैं। तुम चाहो तो महीने में दो किटी पार्टी करो, चार किटी पार्टी करो, नो प्राॅब्लम! सोच लो!! आज की तारीख में कॉर्पोरेट वालों की बहुत डिमांड है। आधी ज़िंदगी तो वो टूर या मीटिंगों  में ही बिज़ी रहते हैं अतः तुमको क्या बोलते हैं उसे ‘माई स्पेस’ ‘माई प्राइवेसी’ भी मिल जाया करेगी। प्लीज़ मैरी मी। [ एक्ज़िट ]

 

नायक नंबर 2 का प्रवेश: (कैप लगाए, हाथ में बैटन) जयहिंद ! (सेल्यूट मारता है) मैं फौजी हूँ कोई ऐरा-गैरा सिविलियन नहीं। हमेशा अनुशासन में रहता हूँ। एकदम सफाई पसंद। मुझ से शादी करोगी तो सोचो कितना आराम ही आराम होगा। बैटमैन क्या पूरी बटालियन तुम्हारा हुक्म माना करेगी। हर हफ्ते बड़ा खाना हुआ करेगा। तुम्हें चौका-चूल्हा नहीं करना पड़ेगा। हर चीज़ सस्ती मिलेगी। बस तुम्हें हुक्म करने की देर है। समझ रही हो ना मैं केंटीन की सुविधा की बात कर रहा हूँ।  बस तुम मेरी सी.ओ. बन जाओ ? ( फिर सेल्यूट एक्ज़िट)

 

नायक नंबर 3: का प्रवेश हाथ में डंडा घुमाते हुए देसी अंदाज़ में : मैडम जी विद ड्यू रिस्पेक्ट आई बैग टू से... आई केम टू नो यू वांट टू मैरी। अपनी पूरे इलाके में धाक है जी। जूरीस्डिक्शन की आप फिकर नाॅट। ये सारे माॅल, रेस्टोरेन्ट जहां आप नज़र डालोगे वो आपकी नज़र होगा जी। आप तो यूं सोचो कि आप ही आई.जी., कमिश्नर, सब हो। क्या आदमी, क्या 'लेडिस' सब पर आपका रौब चलेगा, चलेगा क्या दौड़ेगा जी दौड़ेगा। आप जिसे कहोगे उसे उठवा लिया जाएगा वो भी शुक्रवार की शाम को 48 घंटे उसकी ऐसी खातरदारी करेंगे ऐसी खातरदारी करेंगे कि वो आगे से बस कीर्तन सत्संग करता ही दिखेगा। तुम एक बार अपना हाथ मेरे हाथ में देके तो देखो। हाँ आपका वेट गारंटी बढ़ जाना है जी वो आप जानो। अच्छा चलता हूँ। एफ.वाई. आर. भिजवा देना। नहीं समझे? फर्स्ट यस रिपोर्ट।  बरामदगी तो हम करा ही लेंगे (एक्ज़िट)

 

नायक 4: (सूट टाई कैप पाइप में प्रवेश)      आप सब छोड़ो मादाम प्लीज़ मैरी मी। अपने बैचमेट हर स्टेट, हर शहर में हैं वो सब आपकी सेवा में रहेंगे। घोडा-गाड़ी की कभी कमी नहीं रहेगी। जो जरा भी चूँ करेगा उसको वहीं कायदे से समझा दिया जाएगा। ऐसा उलझायेंगे, ऐसे उलझाएंगे कि ज़िंदगी भर सुलझ नहीं पाएगा। बड़ी बड़ी पार्टियों में आप चीफ गेस्ट बनने की अभी से प्रेक्टिस कर लो जी। बूके की लाइने लग जानी हैं। गिफ्ट्स की तो बरसात होने लगेगी। आप तो यूं सोचो कि बिना इम्तिहान दिये आपने तो खुद आई.ए.एस. बन जाना है। आई.ए.एस. बनने का सबसे आसान तरीका-- मैरी एन आई.ए.एस.

सबमिटिड फॉर एप्रूवल प्लीज़ (एक्ज़िट)

 

नायिका:    वाट दि हैल ! आई डोंट वांट टू मैरी। सॉरी !!! !!!