देखिये ‘जाकी
रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखि तैसी’।
कोई बता रहा है ए.आई.और कुछ नहीं बस एक लोहे का कुत्ता है और नमस्ते कहते जाना
है। यह कैसा जादू है? कभी यह अमेरिका-इंडिया हो
जाता है। कभी ये आई (मराठी में माता) हो जाता है। वो गीत है ना "कभी तू छलिया
लगता है कभी तू..." हमने एक बहुत बड़ा आयोजन भारत मंडपम (पूर्व प्रगति मैदान) में किया जहां की
अव्यवस्था की बातें सब करने लगे। क्यों कि प्रतिभागियों का सामान भी चुरा लिया
गया। अब क्या हम ए.आई. के चलते अपनी चोरी की मूल वृत्ति को भी छोड़ दें। देखिये चोरी करने में ए.आई. काम नहीं आती इसमें
तो ओ. आई. चाहिए बोले तो ओरिजनल इंटेलिजेन्स। कहते हैं ए.आई. के लिए बहुत
ओ.आई.चाहिए। हमारे देश का ए.आई. के फील्ड में पौने दो सौ मुल्क़ों में 72वां स्थान है। अभी तक हमारा मौलिक योगदान ए.आई. के क्षेत्र में ज़ीरो है।
यूं कहने वाले कह सकते हैं जब अमेरिका और चीन कर ही रहे हैं तो भला हमें क्या पड़ी
है अपने पैसे खर्च करने की?
ए.आई. छात्र के लिये
एक स्कूल के विद्यार्थी के लिए ए.आई. और कुछ नहीं वो कुंजी है, वो गाइड है वो हैल्पफुल टीचर है- माँ समान, पिता
समान। ए.आई. ऑलवेज इंटेलिजेंट। अतः आप समझ
सकते हैं कि एक छात्र के जीवन में ए.आई. का कितना महत्व है। वो इसी बात के लिए
तरसता रहता है कि कोई उसे ए.आई. ऑलवेज इंटेलिजेंट कहे। बार बार कहे, कहता ही रहे।
ए.आई. प्रेमी जोड़े के लिए तो
जैसे ऑक्सिजन का काम करती है। आप समझे नहीं ऑलवेज इंटीमेट चाहे मॉल में, थियेटर में, झाड़ के पीछे, पुराने
क़िले में, ओयओ में। हम न होंगे जुदा.. सदा रहेंगे संग साथ।
नहीं तो याद है ना नीला ड्रम
ए.आई. नेता के लिए
गंगाजल की तरह है। हर नेता की चाहत होती है ब्लॉक लेवल से बढ़ कर डिस्ट्रिक लेवल का
हो जाये और फिर एक दिन ए.आई. बोले तो ऑल इंडिया हो जाये। सब उसे पहचानें यहाँ तक
कि वह अपने दल का स्टार प्रचारक बने ताकि हेलीकाॅप्टर से सूबा- सूबा घूम सके और
इससे अपने सूबे में भी स्टेट्स बढ़ता है। अतः नेता को ए.आई. चाहिए, उसकी 'माई एम्बीशन इन लाइफ' हर
नेता को चाहिये, जल्द से जल्द चाहिए।
ए.आई. बिजनिसमैन के लिए
अब देखिये व्यापारी/ सौदागर शुरू से ही इस सरज़मीं पर अपनी कारस्तानी करते आए हैं।
वे चाहते हैं कि वे खुद और उनकी आने वाली उद्यमशील संतानें ए.आई. जैसे बनें। उनका
रोल माॅडल ही ए.आई. है। नहीं समझे? भाई साहब
ए.आई. बोले तो अडानी इंटेलिजेंस, अंबानी इंटेलिजेंस, आकाश इंटेलिजेंस, आदित्य (बिड़ला) इंटेलिजेंस,आदि (गोदरेज) इंटेलिजेंस
ए.आई. फिल्मवालों के लिए
कहाँ से शुरू करें। ऐसे- ऐसे हिदायतकार (डाइरेक्टर) हुए हैं जिन्होंने जो फिल्म
बनाई। ए.आई. से ही बनाई। सब कुछ नकली। क्या मेकअप, क्या
इमारतों के अग्र भाग, क्या रेलवे स्टेशन, क्या गोली-बंदूक। सब आर्टिफ़िशियल है। क्या प्यार क्या मुहब्बत। क्या
रिश्ते-नाते, क्या आंधी-तूफान, क्या
मृत्यु और क्या अंतिम संस्कार। भारत में
फिल्मों में ए.आई. (अर्देशर ईरानी), अरुणा ईरानी, ए.आई. (आलम-आरा इंडिया) की पहली बोलती फिल्म, ए.आई
(ए क्लास इंदरसभा) जिसमें 20-30 नहीं, पूरे
71 गाने थे और ये रिकॉर्ड आजतक बरकरार है। इस सारी रेल-पेल
में एक ए. आई. जिसे आपने नहीं भूलना वह है ए से आसिफ साब की मुग़ले आज़म जिसमें
क्या अकबर, क्या अनारकली सभी तो 'आई'
से इंडियन रहे और वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया। इसमें उनकी शरीक-ए-हयात
अख्तरी (इंडियन) यूं कहने को फिल्म का तो आविष्कार ही ए.आई. ने किया है क्या
मिस्टर आगस्त्य लुमियर (इंटरनेशनल) क्या उनके पिता एंटोनिएट लुमियर (इन्टरनेशनल)
वे फ्रांस के थे और उनका असिस्टेंट फिल्मों को प्रदर्शन के लिये आस्ट्रेलिया ले जा
रहा था जब उसने मुंबई में रुक कर यह जादू का पिटारा वाटसन होटल में खोल दिया था।
यह योगदान हमने नहीं भुलाना है।
ए.आई. पी एच डी स्कॉलर के लिए:
पी एच डी स्कॉलर का तो सर्वस्व ही ए.आई. है। वह चाहे 'घोस्ट राइटर' के रूप में हो या 'कट एंड पेस्ट' के रूप में। आजकल बनी बनाई थीसिस
बाज़ार में आम मिलती है। और क्या बच्चे की जान लोगे। इतनी ए.आई. तो ए.आई. को भी
नहीं पता होगी कि उसके नाम से क्या-क्या चल रेला है।
ए.आई. बेरोजगार के लिए:
उसके जीवन में तो ए. आई. ही ए.आई. है। पहले ए से एड देखो फिर आई से इंटेलिजेंस
लगानी है कि इसका पेपर कैसे लीक कराया जाये। कैसे इसका साॅल्वर अरेंज किया जाये
इत्यादि इत्यादि। लॉकेट में, शर्ट में या चप्पल में
ब्लू टूथ लगवाया जाये। कितना 'टेक्निकल सैवी' ऑलरेडी बन गए हैं सब मेरे भारत महान में।
ए.आई. अग्निवीर के लिए:
देखो भैया आपके लिए तो ए.आई. ये ही है कि कैसे उस 25%
में आना है जिनको रेगुलर किया जाना है। 'ए' से अग्निवीर की 'आई' से
इंटेलिजेंस इसी में है। किसे मक्खन लगाना है और कितना ?
ए.आई. एपस्टीन वाला: भाई ! जो भी नाम आए
जो भी फोटो आए अपुन को बस एक ही बात कहनी है- ये मैं हूं ही नहीं, सब ए.आई. से बना है। बस जास्ती कुछ बोलने का ही नहीं। कराते रहो फैक्ट
चैक। मैं 'ए' से एपस्टीन के 'आई' से आइलेंड गया ही नहीं।
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