ये जो तिलचट्टा है उसी को अंग्रेजी में कॉकरोच कहते हैं। यह लगभग-लगभग हर
घर में पाया जाता है। कभी किचन में कभी बाथरूम में। कई बार यह आपके 'लिविंग रूम' और 'कोर्ट यार्ड'
में भी दिख जाता है। यह एक शाश्वत प्राणी है। ये था, है और रहेगा। कहते हैं 320 मिलियन साल पहले से कॉकरोच हमारे साथ है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि परमाणु बम से दुनिया नष्ट भी हो जाती है तो भी
कॉकरोच जीवित रहेगा, देखी है ऐसी जिजीविषा किसी और में ?
आपने गौर से देखा हो तो इसके आगे मुंह के पास दो डंक जैसे एंटीना
लगे होते हैं जो हरदम हिलते से नज़र आते हैं गोया कि एंटीना सक्रिय है। ऐसा कहा
जाता है ‘दि मीक शैल इन्हेरिट दि अर्थ’।
गोया कि जब कोई नहीं रहेगा तब भी 'एक्स-पार्टे' स्टे के चलते हमारा कॉकरोच रहने वाला है। कोई कुछ भी कहे एक औसत कॉकरोच बस
छह माह से एक बरस तक जीता है और उतने में ही तबाही मचा देता है। वह एक 'एक्साइटिंग' जीवन जीता है, जितना
भी जीता है। मज़े की बात ये है कि उसे कोई डिग्री
नहीं लेनी पड़ती।
कोई मेरे दफ्तर में मुझ से मिलने आया। मुझे
खबर दी गई कि दो कॉकरोच मुझ से मिलने आए हैं। पता चला वे आर.टी.आई. वाले थे।
उन्होने बताया "जी! आर.टी.आई. का जो 'टी' है वो हमारा ही परिचय है 'टी'
बोले तो तिलचट्टा। पता नहीं
आपने 'कॉकरोच-सिंड्रोम' सुना है कि
नहीं। कहते हैं अगर आपको एक कॉकरोच दिख जाये तो यह मान लीजिये कि वह अकेला नहीं
बल्कि आस-पास ही उनकी पूरी की पूरी कॉलोनी है। सुना है कॉकरोच के राजा ने एक सभा
बुलाई है यह जानने को कि ये क्या 'भानगढ़' चल रेली है?
अब भर्ती के विज्ञापन आया करेंगे। जैसे आपने
सिक्यूरिटी गार्ड्स के विज्ञापन देखे होंगे। फलां दफ्तर में सौ कॉकरोच की आवश्यकता
है। एक अच्छी बात ये है कि कॉकरोच को कोई 'नीट'
एक्जाम नहीं देना पड़ता नहीं तो बेचारे छोटे से जीवन में कितना कुछ
सहना पड़ता। न उनके लिए कोई स्कूल-कॉलेज है ना कोई यूनिवर्सिटी। अब चारों ओर कॉकरोच
ही कॉकरोच नज़र आएंगे। उनके लिए मल्टीप्लेक्स होंगे, उनके लिए
मॉल हुआ करेंगे। रेस्टोरेंट और होटल पर तो पहले ही उनका कब्जा है। फिल्मे भी उनके
लिए बना करेंगी। 'दिलवाले कॉकरोच ले जाएँगे', 'कॉकरोच फाइल्स' और गीत भी उनके लिए बनाए जाएँगे। 'अंखियों के झरोखे से देखा जो सांवरे मुझे कॉकरोच नज़र आए', 'कोई चप्पल से न मारे कॉकरोच को'।
एक बात और है कॉकरोच को करेंसी नोटों से कोई
लेना-देना नहीं अतः रुपया पैसा रखने में उनका विश्वास ही नहीं। दीमक नोट खा जाते
हैं पर कॉकरोच तो वह भी नहीं खाता। लोग नाहक ही काॅकरोच को बुरा भला कहते हैं।
कॉकरोच 'ह्यूमन-फ़्रेंडली' है। मनुष्य नाम की प्रजाति अपने को
कितना ही फन्ने खां समझे वे आयेंगे-जायेंगे। कॉकरोच परमानेंट है। वह था, वह है और रहेगा। आप कॉकरोच को
‘विश-अवे’ नहीं कर सकते। कॉकरोच को ‘को-एक्ज़िस्ट’ करना आता है फिर चाहे आदमियों के
साथ रहना हो, कीड़े-मकौड़ों- दीमकों के साथ।
जब तक सूरज चांद रहेगा
काॅकरोच तेरा नाम रहेगा
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