Ravi ki duniya

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Monday, May 18, 2026

व्यंग्य: जीजा ने सपने में छेड़ा था

 

                                            





एक मशहूर शेर है:

 

                   क्या क़यामत है कि आरिज़ उन के नीले पड़ गए

                   हम ने तो बोसा लिया था ख़्वाब में तस्वीर का

 

ये जो सपने हैं ये बहुत ज़ालिम होते हैं। ना ये सोने देते हैं ना ये शांति से जीने देते हैं। बस सपने में दम होना चाहिए उस से कहीं ज्यादा सपने देखने वाले में दम होना चाहिए। एक कहावत है 'सपने सच नहीं होते उन्हें सच करना पड़ता है'। अर्थात उसके लिए बहुत मेहनत करनी होती है तब कहीं जाकर सपने सच होते हैं। एक सूबे में आधी रात को सोते-सोते साली साहिबा जाग गईं और लगी चीखने-चिल्लाने। किस्सा कोताह ये कि साली साहिबा ने रोते-रोते आरोप लगाया कि जीजा जी ने उसे छेड़ा और 'मिसबिहेव' किया। इतना सुनना था कि बीवी ने ही पुलिस को फोन कर दिया। वो अपने पति को अच्छे से जानती थी। लो जी पुलिस आ गयी। मगर ये क्या ? जीजा जी तो फरार हो गये। जिसे पुलिस छेड़ने पर आ जाये वह कितनी देर तक बचता फिरेगा? पुलिस ने जीजा को पकड़ ही लिया। जीजा जी की किस्मत! पुलिस ने फिर जीजा जी को, जी भर के छेड़ा, और ऐसा-ऐसा 'मिसबिहेव' किया जितना जीजा ने साली को भी न छेड़ा था। जीजा थे  एयरफोर्स में। सो खबर सुनते ही लंबी जेल /केस हो गया।  इस चक्कर में नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा।

 

ऐसे केस लंबे चलते हैं। ये केस भी खूब ही चला। जीजा जी को पक्का पता था कि बड़ी मुश्किल है बाबा।  नौकरी तो जानी ही जानी है जेल और सज़ा अलग। तारीख पे तारीख मिलती गई। सच तो ये है कि भले नाबालिग सही, जीजा जी की नियत डोली तो जरूर थी। अब वो नाबालिग बालिग हो अपने जीवन में ठीक-ठाक सैटल थी। उसे जीजा पर दया आ गयी। आखिर अपनी खुद की बहन के घर का सवाल था। मराठी में एक जुमला है ‘नको दाजिबा’ हंसी-ठिठोली में साली जीजा को कह रही है ‘ना जीजा’ मुझे लगता है वकील से सलाह कर के और अपनी जीजी के घर का ख्याल रखते हुए साली ने जो बयान दिया वह चौंकाने वाला था। साली ने अदालत में कह दिया "मी लॉर्ड ! मुझे भ्रम हुआ था। दरअसल जीजा ने मुझे छेड़ा जरूर था मगर सपने में। ख्वाब में छेड़ा था, मैं डर गयी, बाली उम्र मेरी! मैं भला क्या जानूं ख्वाब और असलियत में अंतर। वो उम्र ही ऐसी होती है कहाँ किसको होश रहता है मी लाॅर्ड ये सपना है या हक़ीक़त। मेरे आदरणीय जीजा जी ने मुझे सपने में छेड़ा, मैं डर गयी। मेरी ख्वाब में ही चीख निकल गयी। जिसे सुनकर घरवाले इकट्ठे हो गए और ये सारा कांड हो गया। जीजा से ये पूछो ये मेरे सपने में क्या कर रहे थे ?" जीजा कह रहा है "भई ! सपना तेरा, तू डिसाइड कर क्या देखना है क्या नहीं" मी लॉर्ड! भी सारा माजरा समझ गए। आखिर उन्होंने इस दु:स्वप्न को अंत करने का डिसाइड किया और मामला रफा-दफा कर दिया। ये मामला लीगल से ज्यादा मामला ख्वाब का निकला।

 

                                ज़िंदगी ख्वाब है!

                                ख्वाब में सच है क्या

                                और भला झूठ है क्या

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