Ravi ki duniya

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Saturday, July 4, 2026

12वीं फेल

 

इस प्रकार के शीर्षक ऐसा आभास देते हैं जैसे आई.ए.एस. और आई.पी.एस. के लिए किसी शैक्षिक योग्यता अर्थात पढ़ाई-लिखाई की ज़रूरत नहीं है बस सीधे-सीधे आपका इंटरव्यू लिया जाएगा और आपको तैनाती दे दी जाएगी। अभी मेरी नज़रों से एक और हैडलाइन गुजरी जो 12वीं भी नहीं बल्कि कह रही है फलां '5वीं फेल' आई.ए.एस. बन गयी। बोले तो अगर 12वीं फेल आई.पी.एस. बन सकता है यह तो एक कदम और आगे की बात है जहां मोहतरमा महज़ 5वीं फेल हैं और आई. ए.एस. बन गईं हैं। सच तो यह है कि ये हैडलाइन्स गुमराह करने वालीं हैं। दरअसल कभी अपने शैक्षिक कैरियर में वो कभी 5 वीं जमात में अथवा 12 वीं जमात में फेल हुए होंगे, मगर इसका मतलब ये नहीं कि फिर वे सीधे यू.पी.एस. सी. ही जा पहुंचे कि अब हमें आई.ए.एस./ आई.पी.एस. बनाओ।

 

जिन्हें ना पता हो उनकी मालूमात के लिए बता दूँ कि इस सिविल सर्विस की परीक्षा के लिए आपका ग्रेजुएट होना न्यूनतम योग्यता है। अब चाहे वह आपने बी.ए. किया हो बी. कॉम. किया हो या बी.एस. सी. किया हो। मोटा-मोटा आपका ग्रेजुएट होना मिनिमम है। फिर आप डॉक्टर हों, इंजीनियर हों, बी.डी.एस. हों, बी.फार्म हों या बी.बी.ए./बी.सी.ए. हों। ये शैक्षिक योग्यता किसी रिकाॅग्नाइज़ यूनिवर्सिटी से होनी चाहिए । अर्थात ना केवल आपकी डिग्री बल्कि संस्थान जहां से किया है दोनों मान्यता प्राप्त होने चाहिए। हाँ उम्र आप 32 साल तक दे सकते हैं इसमें 5 साल एस.सी./एस.टी. के 3 साल ओ.बी.सी. के जोड़ दीजिये। इसी तरह कितने चांस मिलेंगे यह भी निर्धारित है।

 

अब यह कहना कि फलां 12 वीं पास कालांतर में आई.पी.एस. बन गया या फलां 5वीं पास आई.ए.एस. बन गयी ये सही है मगर मिनिमम स्नातक बनाने के बाद। ये वैसे ही है जैसे कोई कहे कि निमोनिया ग्रस्त ने रेस जीती अरे भाई निमोनिया अगले को बचपन में हुआ था अब वो रेस जीतने लायक है सो जीत ली। ये नहीं कि जब वो दौड़ रहा था तब निमोनिया से पीड़ित था। एक और बीमारी आजकल चल पड़ी है फलां के पिता तांगा चलाते थे। उनका लड़का आई.ए. एस. बन गया। फलां मजदूर का बेटा आई.पी.एस. बन गया अथवा फलां की मां  बर्तन माँजती थीं और बेटी ने आई.ए.एस. बन कर दिखाया। यह ऐसी खबरें इसीलिए चलाई जातीं हैं कि आप भी प्रेरित हों। इम्तहान देने को। इस आई.ए.एस. की परीक्षा ने इतने घर बसाये नहीं हैं जितने यूथ लाइन से बे-लाइन बोले तो डिरेल किए हैं। एक तो हमेशा को ये दर्द दे दिया है कि हाये हम क्यूँ ना बन पाये, फलां तो मुझ से भी ज्यादा नालायक था, वह बन गया। दूसरे उनके विचारों में एक प्रकार का टेढ़ापन आ जाता है। बहुधा वे आई.ए. एस. को गाली ही देने लग पड़ते हैं। एक सज्जन बोले कि रामलाल मेरे बैच का आई.ए.एस. है। मैं असंजमस में था कि ये सज्जन तो आई.ए.एस. हैं नहीं। फिर वे बोले जिस साल मैंने इम्तिहान दिया था मैं रह गया था और ये रामलाल पास हो गया था। तो हुआ ना मेरे बैच का।

 

यह परीक्षा कोई तुक्का नहीं है। ना ही इसे गंभीर केंडीडेट्स को कैज्युली लेना चाहिए। ये एक साधना की तरह है। आपको दीन-दुनिया की दुनियावी बातों से दूर एक ऐसी गुफा में जाना है। ना कोई सोशल मीडिया ना कोई दोस्त-यार। यह दो से तीन साल की तपस्या मांगती है कमसेकम। आप उनसे अपनी तुलना ना करें जो जीनियस हैं, गाॅड गिफ़्ट्ड हैं अथवा लकी हैं। मेहनत पहली शर्त है दूसरे आपका लक है वह भी मात्र इतना है कि आपके अच्छे से याद किए सवाल आ जायें। जैसा मैंने कहा कोई तुक्का काम नहीं आता। इतनी जगह आपकी लियाकत देखी जाती है कि तुक्के की या चांस की कोई जगह रह नहीं जाती। प्रेलिमिनरी (जिसमें नेगेटिव मार्किंग होती है) सवाल ज्यादा, टाइम कम। फिर मेन परीक्षा वह भी नौ पेपर्स:

1. सामान्य हिन्दी (300 अंक)

2. सामान्य अंग्रेजी (300 अंक)

(यह दोनों पेपर क्वालिफाइंग है। अर्थात पास करना अनिवार्य

 है। इसमें फेल तो बाकी पेपर्स जांचे ही नहीं जायेंगे। मार्क्स

 मैरिट निर्धारण में नहीं जुड़ेंगे)

 

3. निबंध (250)

4. सामान्य ज्ञान I (250) (इतिहास/हेरीटेज/सोसायटी)

5. सामान्य ज्ञान II (250) पाॅलिटी/गवर्नेंस /अंतराष्ट्रीय

 संबध)

6. सामान्य ज्ञान-III (250) अर्थशास्त्र/विज्ञान/सुरक्षा

7. सामान्य ज्ञान-IV (250) Ethics नैतिक शास्त्र/

सत्यनिष्ठा/एप्टीच्यूड

8. वैकल्पिक विषय पेपर-1 (250)

9. वैकल्पिक विषय पेपर-II (250)

(एक वैकल्पिक विषय 48 विषयों की दी गई सूची में से चुनना

 होता है। उसी के दो पेपर होते हैं)

 

आपका कोई दांव काम नहीं आयेगा सिर्फ मेहनत काम आएगी। फिर 40-45 मिनट का 5 से 7 वरिष्ठ एक्सपर्टों द्वारा आपका इंटरव्यू (275 मार्क्स) और फिर कड़ी मेडिकल जांच। मेडिकल में आपको कोई रेस नहीं लगानी है ना दंड-बैठक पेलने हैं। बस वे मानक पूरे करने हैं जो पूर्व निर्धारित हैं। आपका चयन हो जाने पर आपको सर्विस कौन सी मिलेगी यह निर्भर करता है आपकी रेंक -कम - वेकेन्सी -कम -चाॅइस पर। याद रखें जो चुने जाते हैं वह भी हमारी आपकी तरह ही होते हैं। आपको तो बस एक सीट भर चाहिये। आप यह फाॅर्मूला समझिये कि किसी बरस अगर एक हजार रिक्ति का विज्ञापन है तो प्रेलिमनरी में भले 8 लाख केंडीडेट्स बैठें या दस लाख बैठें पास केवल रिक्तियों का दस गुना मतलब दस हजार पास किये जायेंगे। ये दस हजार मेन परीक्षा देंगे। इंटरव्यू के लिये इन दस हजार में से केवल दो हजार पास किये जायेंगे। अंत में इंटरव्यू में इन दो हजार में से एक हजार पास होंगे। 

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