मुंशी प्रेमचंद की कहानी 'बड़े भाई साहब' में बड़े भाई साहब को यह नैसर्गिक
अधिकार प्राप्त है कि वह छोटे भाई को जब-तब, बोले तो जब चाहे,
डांट सके। चाहे छोटा भाई कितना ही अच्छा कर रहा हो। कहावत है कि यदि
आप अपने अधिकार का प्रयोग नहीं करते हैं तो वह अधिकार 'डिसयूज़'
में जाते-जाते समाप्त प्राय: हो जाता है। राजस्थान में इसे ‘दम देना’ कहा जाता है। कहीं-कहीं इसे 'फायरिंग
करना' भी कहा जाता है।
फर्ज़ करो आप बॉस हैं और आपके मातहत एक रामलाल
नामक कर्मचारी काम करता है। वह ठीक-ठाक है। मगर आप गौर से देखेंगे तो उसमें कोई न कोई कमी ज़रूर
ढूंढ लेंगे। मुझे आपकी इस प्रतिभा पर पूरा भरोसा है। आप भी अपने ऊपर भरोसा रखें। राम
लाल को डांटने के निम्नलिखित ग्राउंड्स हो सकते हैं:
1. वह दफ्तर लेट आता है: भई तुम्हें
पता है दफ्तर कितने बजे का है? तुम्हारे पास घड़ी है ?
और अगर है तो क्या वह सही समय देती है? क्या
तुम्हारी घड़ी किसी और देश का टाइम बताती है। एक तुम्हें छोड़ कर पूरा दफ्तर समय पर
आ जाता है तुम कोई निराली सवारी में आते
हो ? इसी शहर से आते
हो या किसी और दूसरे शहर से आते हो? मैं तो परेशान आ गया हूँ
तुम्हारी इस आदत से।
2. वह दफ्तर टाइम से पहले अर्थात जल्दी
आता है: क्या बात है तुम नहा-धो कर दफ्तर आते हो न? सुबह- सुबह मुंह उठाए दफ्तर चले आते हो। तुम्हें नींद ठीक से आती है न?
तुम इतनी जल्दी आकर क्या फाइलें उलट-पुलट करते रहते हो?कहीं हमारे दफ़्तर की खबर हमारी 'राइवल' कंपनी को तो नहीं देते ? इतनी जल्दी आने का क्या मतलब है? मुझे तो तुम पर शक़
पड़ने लगा है।
3. वह टाइम पर आता है: भई ऐसे टाइम पर
आने का क्या ही फायदा ? यहां कोई गिनेस बुक का
रिकॉर्ड नहीं बन रहा है। आदमी काम का पक्का होना चाहिए। सिर्फ एक टाइम पर आ जाना
ही सबकुछ नहीं होता। यूं टाइम पर आना अच्छी बात है मगर काम में 'एफ़िशियेन्सी' होनी चाहिए। काम को प्राथमिकता के आधार
पर करने की समझ होनी चाहिए। आई एम नाॅट हैपी विद यू (बीच बीच में अंग्रेज़ी बोलने
से प्रभाव पड़ता है। अगला कन्फ्यूज़ रहता है कि जवाब हिन्दी में दे या अंग्रेज़ी
में)
4. वह जल्दी चला जाता है: क्या भई
तुम्हें अभी तक ये ही पता नहीं चला कि दफ्तर भले छह बजे तक का है मगर सब साढ़े छह
जाते हैं। वे पागल नहीं हैं। अपनी सब फाइलें अलमारी में रख कर, अपनी टेबल तरतीब से लगा कर और कल की ‘टू डू लिस्ट’ बना कर ही जाते हैं। एक
तुम हो इतने 'कैज्युल'! बस जाने की पड़ी
रहती है। तुम्हारी नज़र काम पर कम घड़ी पर ज्यादा रहती है। कब छह बजें और भागें। भई
हमारे भी बीवी बच्चे हैं। हम अनाथ नहीं हैं।
5. वह ऑफिस से लेट जाता है: क्या भाई
तुम्हारी तबीयत तो ठीक है? घर में कोई लड़ाई-वड़ाई चल
रही है क्या? क्यों इतनी देर तक बैठे रहते हो? काम तो क्या ही करते होगे। बेकार ऑफिस की पंखा/लाइट/ए.सी. चलता रहता है।
बेचारे प्यून भी तुम्हारी वजह से बैठे रहते हैं। अपने काम को ऑफिस-टाइम में खत्म
करने की आदत डालो। अपनी 'प्रोडक्टविटी' बढ़ाओ। ऐसे नहीं चलेगा। टाइम से आओ टाइम से जाओ। कल को बीमार-शीमार हो गए
तो सोचा है कभी काम का कितना हर्जा होगा?
6. वह टाइम से जाता है: भई ये क्या ? मैंने
सुना है तुम "छहई" बजे चले जाते हो (ये डायलाॅग एक बार मुझे अपने बॉस से
सुनना पड़ा था) अगर ऐसा है तो हमें तुम्हारी पोस्ट के लिए कोई और आदमी ढूँढना
होगा। तुम्हें तो आते ही बस भागने की पड़ी रहती है। कब छह बजें और मैं भागूँ। लगता
है तुम्हारा काम में मन-वन नहीं लगता।
7. वह हमेशा टार्गेट पूरा करता है: भई
ये क्या ?
(इससे वो कनफ्यूज़ होगा) ये अच्छी बात है तुम अपना टार्गेट पूरा करते
हो। मगर ऐसे तुम कोई अनोखे नहीं हो। तुमसे पहले भी और तुम्हारे बाद भी बहुत लोग
टार्गेट पूरा करेंगे। बात होती है आदमी कितना मिलनसार है। कितना सहयोग करता है।
उसमें कितना सहकार है। तुमने सुना नहीं 'ऑल वर्क नो प्ले
मेक्स जैक ए डल बॉय'
8. वह टार्गेट पूरा नहीं कर पता: एक
टार्गेट तो तुमसे पूरा होता नहीं। क्या ही तारे तोड़ोगे तुम। तुम्हें तो बस कोई काम
बता दो और निश्चिंत हो जाओ कि ये काम कभी टाइम पर पूरा होगा ही नहीं। तुम्हारी
प्रॉब्लम क्या है? क्या तुम्हें वेतन काम करने
का मिलता है या काम न करने का या फिर घिसट-घिसट कर करने का मिलता है। मुझे शर्म
आने लग पड़ी है। एक तुम हो न जाने कौन सी मिट्टी के बने हो। काम में मन लगाओ नहीं
तो 'आई एम एफ्रेड मुझे तुम्हें इस दफ्तर से ट्रांसफर करने के
लिए कहना पड़ेगा। 'आई एम फीलिंग बैड एवरी टाइम आई हैव टू टैल
यू सच ए सिंपल थिंग'
9. वह टार्गेट से ज्यादा काम करता है:
भई रिलेक्स! मुझे लगता है तुम मेरी नौकरी खा जाओगे। इतनी जल्दी जल्दी काम करने को
तुमसे किसने कहा? अब क्या करोगे? बस हाथ पर हाथ रख कर बैठे रहोगे। जब तक अगला असाइनमेंट नहीं आता। भई हर
दफ्तर, हर काम की एक स्पीड होती है। तुम भारत में हो। अमरीका
में नहीं। मैं नहीं चाहता कि तुम अपना काम तो सबसे पहले खत्म कर लो और फिर दूसरों
को डिस्टर्ब करो उन्हें काम न करने दो।
10. वह लंच में गायब हो जाता है: भाई
कहाँ गायब हो जाते हो? तुम्हारी ज़रूरत थी। पूरा
दफ्तर यहीं बैठ कर लंच करता है एक सिवाय तुम्हारे। तुम क्या किसी फाइव स्टार में
लंच को जाते हो ? ऐसे
रोज़ रोज़ बाहर का खाना कोई अच्छी बात नहीं। तुम्हारी कभी भी ज़रूरत इमरजेंसी में पड़
सकती है। आसपास ही रहा करो प्लीज़। आई होप यू अंडरस्टेंड
11. वह लंच करता ही नहीं: ये क्या ? मैंने सुना
है तुम लंच ही नहीं करते। तुम्हारी हैल्थ ठीक है? लास्ट
एक्ज्युकिटिव हैल्थ चैक-अप कब कराया था तुमने ? क्या तुम घर
से लंच करके आते हो ? लगता तो नहीं। भाई ऐसे अपनी हेल्थ
नेगलेक्ट करोगे तो बीमार हो जाओगे अपना नहीं तो हमारा, हमारे
दफ्तर का कुछ ख्याल करो। अब मैं तुम्हें
कैसे समझाऊँ ? वी नीड यू मैन! लुक आफ्टर योरसेल्फ।
12. वह लंच में सोता है: वाट इज़ दिस ? तुम दफ्तर क्या सोने 2. *वह लंच में सोता है* वाट इज़ दिस ? तुम दफ्तर क्या सोने के लिए आते हो? मैंने तो आजतक
कोई नहीं देखा जो दफ्तर में सोता हो। इससे ऑफिस का एट्माॅस्फियर खराब होता है।
किसी अच्छे डॉ. को दिखाओ और अपनी नींद घर में ही पूरी करके आया करो तुम्हें छुट्टी
चाहिए मैं दे दूंगा बट इन फ्यूचर नो मोर स्लीपिंग इन ऑफिस।
13. वह इण्ट्रोवर्ट /एक्स्ट्रोवर्ट है: भाई ये क्या मनहूस सूरात बनाए फिरते रहते हो? किसी से हंसना नहीं बोलचाल नहीं।, बस घुन्ने की तरह
सब को देखते रहते हो। 'ऑफिस वर्क इज़ टीम वर्क' कल को तुम भी बॉस बनोगे। अपने टीम को साथ रखो (कैरी योर टीम ) ये रोनी
सूरत मैं कल से नहीं देखूँ। _अगर एक्स्ट्रोवर्ट_ है: भाई ये क्या सारा दिन हा-हा, ही-ही करते रहते
हो। ये कोई अच्छी आदत नहीं सबके फटे में टांग अड़ाते फिरते हो। लोगों की पर्सनल
लाइफ भी कोई चीज़ होती है। ये सबके घर में घुसने की तुमको क्या पड़ी है फलां कैसे हैं ? बच्चे कैसे है? प्लीज़! पीपुल नीड देयर पर्सनल स्पेस।
प्रिवेसी भी कोई चीज होती है (प्राइवेसी मत बोलना, आजकल 'प्रिवेसी' ट्रेंड कर रहा है)
14. वह हरदम हँसता रहता है: क्या भाई ये हरदम ऑफिस में जोक-वोक चलते रहते
हैं क्या?
पूरे ऑफिस में बस तुम्हारे हँसने की आवाज आती रहती है। ऑफिस में
थोड़ा सीरियस होना सीखो। ऑफिस आए हो पिकनिक पर नहीं। इससे बाकी स्टाफ पर बुरा असर
पड़ता है। वे काम को सीरियसली नहीं लेते। 'यू आर ए बैड
इनफ्लुएंस ऑन दैम'
15. वह हरदम रोनी सूरत बनाए रखता है:
भाई ये मुंह लटकाए क्यूँ घूमते रहते हो ? कौन सा ग़म
है जो तुम्हें खाये जा रहा है? दफ्तर आए हो किसी ग़मी में
नहीं। मैं ये नहीं कहता कि खिलखिलाते फिरो पर स्माइल तो कर लिया करो। तुमने सुना
नहीं 'फेस इज़ दि इंडेक्स ऑफ माइंड' स्माइल
से एक पॉज़िटिव फील आता है। पूरे दफ्तर में एक पॉज़िटिव एनर्जी का एटमाॅसफियर रहता
है।
16. वह ऑफिस के आउटडोर प्रोग्राम से कन्नी
काटता है: क्या भाई ? तुम तो जरा भी सोशल नहीं हो। मैंने जब सुना मुझे तो यकीन ही नहीं हुआ पर
अब जब तुम ऑफिस के प्रोग्राम में नहीं आए तो पता चला कि लोग तुम्हारे बारे में ठीक
ही कहते हैं। भाई ठीक है तुम्हारी कोई प्रॉब्लम हो सकती है, हम
सबकी प्रॉब्लम होती हैं। तुम्हें क्या लगता है हमारी कोई प्रॉब्लम नहीं। आखिर हम
फिर भी ऑफिस के सोशल प्रोग्राम में आते-जाते हैं ना कि तुम्हारी तरह चिल्ला खींच
कर बैठ जाएँ। इससे अपनी टीम को अच्छे से जानने का मौका मिलता है। कालान्तर में 'स्वैट एनालिसिस' में हेल्प मिलती है। तुम्हारे
स्ट्रॉंग और वीक पॉइंट मैनेजमेंट को पता रहते हैं। 'फाॅरेन
असाइनमेंट' भी यही सब देख कर दिये जाते हैं जब तुमसे इसी शहर
में कहीं आया-जाया नहीं जाता तो फाॅरेन
क्या खाक जाओगे।
17. वह ऑफिस के सभी आउटडोर प्रोग्राम में
आता है: क्या भाई तुम्हारा कोई घर-बार
है भी या नहीं? जब देखो, जिस
प्रोग्राम में देखो कोई हो न हो तुम जरूर होते हो...एक ही 'वेला'
आदमी है। देखो हर बार हर जगह जाने की ज़रूरत नहीं होती। लोग बुलाते
हैं का मतलब ये नहीं होता कि जाना कंपलसरी है।
18. वह छुट्टी नहीं लेता: क्या भाई ? कहीं तुम बीमार न पड़ जाना मुझे तो डर ही लगा रहता है। सुना है बुखार हो,
सिर दर्द हो तुम ऑफिस चले आते हो।
ये ऑफिस है हैल्थ यूनिट नहीं। अंग्रेजों ने छुट्टी चलाई इसलिए थी कि माइंड
को रिलेक्सेशन मिले। हम सब आदमी हैं। मशीन नहीं। हम सबको रैस्ट की ज़रूरत होती है।
आगे से ये सुपरमैन बनने की कोई ज़रूरत नहीं। जब लगे जिस्म साथ नहीं दे रहा है तो
छुट्टी लें। भूल गए ! आदमी एक 'सोशल एनिमल' है। तुम्हारी भी कोई सोशल लाइफ है या
नहीं? घर में बाल- बच्चे भी कहते होंगे कैसे पापा हैं ?
हमारे लिए इनके पास टाइम ही नहीं।
19. वह बहुत छुट्टी लेता है: क्या भाई मुझे तो लगता है तुम को नौकरी की क्या
ज़रूरत है?
जब देखो तब छुट्टी। जब तुम्हारी ज़रूरत हो मजाल है जो तुम ऑफिस में
हो। पता चलता है हुज़ूर छुट्टी पर हैं। अब रोजी-रोटी को इतने केज्युल भी मत लो।
नौकरी है ये। एक बार छूट गई तो दूसरी इस उम्र में मिलनी भी नहीं। देखा नहीं बाहर
क्या हाल चल रहा है। अब नौकरी मिली है तो उसकी इज्ज़त करना सीखो। प्लीज़ छुट्टी
मिलती है का मतलब ये नहीं होता कि छुट्टी लेनी भी है। तुम्हारी छुट्टी है कोई और
नहीं लेके भागा जा रहा तुम्हारे खाते में ही रहेगी।
20. वह वेतन बढ़ाने की मांग करता/नहीं करता
है: एक बात बताओ ये क्या जब देखो तब तुम सेलेरी बढ़ाने की कहते रहते हो। सरकार
भी दस साल में एक बार बढ़ाती है एक तुम हो जो हर छह महीने बाद सूरत लटकाये चले आते
हो। भूल गए अभी तीन साल पहले ही तुम्हारी सेलेरी बढ़ाई थी। तुमसे आधी तनख्वाह पर
आने को लोग लाइन लगाए खड़े हैं। गो ! अब कुछ काम भी कर लो जब वह वेतन बढ़ाने
की मांग ही न करे: क्या भाई तुम्हारे बाल-बच्चे हैं या नहीं? चुपचाप काम करते रहते हो दफ़्तर में सबके रिप्रेजेंटेशन आ गए वेतन बढ़ाने
को। एक तुम हो तुम्हारा कोई आवेदन ही नहीं है। क्या तुम्हारी तनख्वाह बस है। पूरी
पड़ जाती है? अगर नहीं तो कहाँ है तुम्हारा रिप्रजेंटेशन?
अपनी नहीं तो अपनी टीम की, दफ्तर के अपने
कुलीग्स का कुछ तो ख्याल करो। कुछ तो को-ऑपरेट करा करो। माना तुम्हें बढ़े हुए वेतन
की कोई ज़रूरत नहीं और दफ़्तर में सब तो तुम्हारी संतोषी जीव नहीं। सबकी अपनी ज़रूरत
होतीं हैं। उनका तो ख्याल करो 'डोंट ऑलवेज बी सैल्फिश'।