Ravi ki duniya

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Wednesday, July 15, 2026

अच्छा तुम्हारे शहर का दस्तूर हो गया

                           (बशीर बद्र जी से मुआफी के साथ)


अच्छा तुम्हारे शहर का दस्तूर हो गया

जिसको उधार दिया वो दूर हो गया

कागज में दब के मर गए कीड़े किताब के 

क्वेश्चन-पेपर लीक जब से मशहूर हो गया

स्कूल कॉलेज दफ्तर बंद कर दिये हैं हमने 

गो कि मंदिर का चन्दा मंदिर से दूर हो गया

‘एवार्ड्स’ की भूख ने तोड़ दी उनकी अना

चुनाव नज़दीक देख ग़लत-सही का फर्क काफ़ुर हो गया

अपने नाती-पोतों को उसकी कहानी सुनाना

जब मेरे मुल्क का आवाम मुफ्तखोर हो गया

सुब्ह-ए-विसाल पूछ रही अज़ब सवाल

इंसानी-हुकूक में मुल्क पास हुआ या कोसों दूर हो गया

उस दिन से मेहनत करेगा आवाम

खैरात का बस्ता जिस दिन उसे नामंज़ूर हो गया

 

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