किसी भी प्रदेश का नाम बिगाड़ना नहीं चाहिए। उत्तर प्रदेश का नाम अंग्रेजों के टाइम में यूनाइटेड प्राॅविन्स था। बाद में हमारी अपनी भारत सरकार ने इसका नाम उत्तर प्रदेश कर दिया। उत्तर में है तो उत्तर प्रदेश। जनसंख्या तो तब भी सार्वाधिक रही होगी। अतः उत्तर प्रदेश वालों को भी पता रहा होगा प्रश्न चाहे कोई हो उत्तर हमारे ही पास है। कितने ही प्राइम मिनिस्टर, शायर, कवि, ताज महल। बड़े-बड़े पागलखाने उत्तर प्रदेश की ही देन है। कहते हैं कि अगर आप प्यार में सफल हो जाते हैं तो आपके लिए ताजमहल है और अगर असफल हो जाते हैं तो घबराएँ नहीं आपके लिए पागलखाना आगरा में ही खिदमत में हाजिर है। यू.पी. को यूं कहने वाले उल्टा प्रदेश भी कहते हैं। लेटेस्ट टीचर्स के लिए एक पात्रता परीक्षा 2026 का आयोजन किया गया। इस प्रश्नपत्र में एक प्रश्न था 'एक आँख से देखना' का अर्थ क्या होता है। इसके लिए मल्टीपल उत्तर दिये गए थे यथा सभी को एक समान दृष्टि से देखना/व्यवहार करना। दूसरा विकल्प था अंधाधुंध करना आदि आदि। अब अभी तक जो हमने पढ़ा-समझा था उसके अनुसार उत्तर बनता है समान दृष्टि से देखना/व्यवहार करना। किन्तु जब आयोग ने उत्तर कुंजी जारी की तो उसमें सही उत्तर अंधाधुंध करना बताया गया। अब परीक्षार्थियों में इसे लेकर बेहद रोष है क्यों कि उन्होने भी यही समझा था कि सही उत्तर है एक समान व्यवहार करना। इस आँख ने और भी कहर ढाये हैं। एक बच्चे ने मम्मी को बताया “मम्मी ! पापा आंटियों से बहुत डरते हैं उन्हें देख कर अपनी एक आँख बंद कर लेते हैं”
दरअसल, ये नयी
पीढ़ी अभी तक समझी ही नहीं। भाई लोग अब आज
के युग में इस का अर्थ अंधाधुंध करना ही है। ये जो अंधेरगर्दी चल रही है ये आपको
दिखती नहीं है या आप जानबूझ कर एक आँख क्या दोनों आँखें बंद कर असलियत से दूर हैं।
भाई लोग गांठ बांध लें अब एक आँख से देखने का अर्थ अंधाधुंध करना ही है। आप एक आँख
की कह रहे हो मैं कहता हूँ एक क्या दोनों आँखों का अर्थ भी आजकल अंधाधुंध करना है।
क्या कर लोगे तुम ? खामोश ! नहीं तो अभी दस साल के लिए डिबार
कर देंगे तब समझ लगेगी। देखो! शब्द अपने अर्थ, देश-काल
अनुसार अदलते-बदलते रहते हैं। जब होता होगा तब होता होगा कि गुरु आदर का सम्बोधन
था, अब नहीं। अब किसी को गुरु कहना ऐसे कहना है जैसे वह कोई
महा मक्कार, धूर्त व्यक्ति है बोले तो गुरुघंटाल। किसी की
अच्छी मरम्मत करना और बुरी तरह पीटना, एक ही बात है। यानि की
बुरी तरह कुटाई करना और अच्छी तरह धुनाई करना एक ही हो गया। ये ही क्या और ऐसी
बहुत सी कहावतें और मुहावरे निकल आएंगे जिनको आज के संदर्भ में देखना और उनके अर्थ
में तब्दीली करना जरूरी है। , मसलन एक मुहावरा था नेकी कर
कुएं में डाल। अब कुएं नहीं हैं अतः लोग नेकी भी नहीं करते। नेकी कर कहाँ कुआं
ढूंढते फिरेंगे? अतः या तो नेकी नहीं करते या नेकी इतनी
सूक्ष्म करते हैं जिसे फ्लश किया जा सके। अतः नया मुहावरा है नेकी कर जूते खा।
क्यों कि जिसके साथ आप नेकी कर रहे हैं वह आपको मुंह पर कुछ भी कहे, समझता आपको बुड़बक ही है। घर आए मेहमान को भगवान का रूप समझिए। ‘होम स्टे’ के इस जमाने में पता नहीं आप किस जमाने में जी रहे
हैं। झूठ बोलने पर कान पक जाते हैं।
शेक्सपियर बहुत पहले कह गए थे 'नथिंग इज़ गुड और बेड
थिंकिंग मेक्स इट सो'। अतः जो आयोग ने उत्तर प्रदेश में जो
उत्तर दिया है उसी को पत्थर की लकीर समझिए। नहीं तो एक क्या दो आँखों से भी
अंधाधुंध करने-करवाने के लिए तैयार रहें। इस पर जरा दोनों आँखें बंद कर सोचिए !
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