Ravi ki duniya

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Wednesday, July 15, 2026

विधायक फ़रोश

 


 (वरिष्ठ विद्वान एवं कवि श्रेष्ठ दद्दा भवानी प्रसाद मिश्र जी से क्षमा सहित) 


जी हाँ हुज़ूर मैं विधायक बेचता हूँ

मैं तरह-तरह के विधायक बेचता हूँ

मैं किसिम-किसिम के विधायक बेचता हूँ

जी, माल देखिये, दाम बताऊंगा,

बेकाम नहीं हैं काम बताऊंगा

कुछ विधायक लिए हैं मस्ती में मैंने

कुछ विधायक लिए हैं बस्ती मे मैंने 

कुछ टेक्स डिफ़ाल्टर विधायक हैं मेरे पास

कुछ विधायक डिस्प्रोपेशनेट असेट वाले हैं

यह विधायक हेल्थ ग्राउंड पर आता-जाता है

यह विधायक खोखे देख खिंचा जाता है 

जी, शुरू में जरूर शर्म लगी मुझको;

पर बाद-बाद में अक़्ल जगी मुझको,

जी, लोगों ने तो बेच दिए ईमान,

जी, आप न हों सुनकर ज़्यादा हैरान—

मैं सोच समझ कर आख़िर

विधायक बेचता हूँ,

जी हाँ हुज़ूर, मैं विधायक  बेचता हूँ,

मैं तरह-तरह के विधायक बेचता हूँ,

मैं क़िसिम-क़िसिम के विधायक बेचता हूँ!

यह विधायक देशभक्ति के गीत सा है गाकर देखें,

यह विधायक गंदी गाली सा है गरिया कर देखें

यह विधायक वहाँ  ई डी की रिपोर्ट में लिक्खा था,

यह विधायक सी बी आई की फाइल में  रक्खा था,

यह विधायक पहाड़ी को रात-रात में समतल कराता है,

यह विधायक विकास के नाम पर बस पेड़ कटवाता है!

यह विधायक भूखा-प्यासा आमरण अनशन कराता है

जी, यह गाँव-गाँव जाकर  हिन्दू-मुसलमान कराता है,

यह विधायक रिज़ॉर्ट में ही सरकार बनवा देता है हुज़ुर,

यह विधायक दो दिन में बहुमत मुहैया कराता है हुज़ूर,

जी, और विधायक भी हैं दिखलाता हूँ,

जी, परेड कराना चाहें आप तो नचवाता हूँ।

जी, कुर्ते-पाजामे वाले पसंद करें,

ये बंडी-धोती विधायक मंत्रिपद पर तुरंत मरें!

ना, बुरा मानने की इसमें क्या बात,

मैं ले आता हूँ सफारी सूट वाले विधायक

इनमें से भाए नहीं ? नए पेश कर दूँ

जी नई उम्र के नहीं तो क़ब्र में पाँव वाले भी हैं

मैं नए, पुराने सभी तरह के

विधायक बेचता हूँ,

जी हाँ हुज़ूर, मैं विधायक बेचता हूँ,

मैं तरह-तरह के विधायक बेचता हूँ,

मैं क़िसिम-क़िसिम के विधायक बेचता हूँ!

ये विधायक बस नाम का ज़िंदा है इसे रखूँ ?

आपके ऑर्डर में कितने विधायक लिखूँ ?

यह विधायक रा सिल्क वाला, यह खादी का है

यह विधायक पित्त का तो ये वाला बादी का है

कुछ और विधायक डिज़ाइन-टू-ऑर्डर भी हैं

यह लीजिये  चलती चीज़ एक्स फ़िल्मी,

यह सोच-सोच कर मर जाने वाला विधायक ,

यह एक दल से दूजे दल जानेवाला विधायक !

जी नहीं, दिल्लगी की इसमें क्या बात,

मैं बेचता-खरीदता ही तो रहता दूँ दिन-रात,

 तरह-तरह के हैं स्टॉक में विधायक

गोदाम से और मँगवाता हूँ विधायक 

जी, रूठ-रूठ कर मन जाते हैं विधायक!

जी बहुत ढेर लग गया, हटाता हूँ,

गाहक की मर्ज़ी, अच्छा जाता हूँ;

या भीतर जाकर पूछ आइए आप,

है विधायक बेचना वैसे बिल्कुल पाप,

क्या करूँ मगर लाचार

जब वो खुद ही हैं बिकने को तैयार

हार कर विधायक बेचता हूँ!

जी हाँ हुज़ूर, मैं विधायक बेचता हूँ,

मैं तरह-तरह के विधायक बेचता हूँ,

मैं क़िसिम-क़िसिम के विधायक बेचता हूँ!

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