नेता जी ने अपनी एक जनसभा में बहुत अच्छी बात
कही है। सिर्फ सवाल ही न उठाएँ, उन सवालों के जवाब भी बताएं। यानि कि आप न केवल समस्या बताएं उसका हल देना
भी आपकी जिम्मेवारी है। मसलन आपका सवाल है “साब मेरी रोज़ी-रोटी का क्या होगा ?”
अब आपको, इसे सवाल कहो, समस्या
कहो, का हल भी देना है, अर्थात उत्तर
भी देना है। जैसे मुझे रोज़ी की समस्या है! तो आप ये भी तो बताओ आप आय का साधन ढूंढ
रहे हो, उदहारण के तौर पर या तो आप कोई काम ढूंढ रहे हो या
नौकरी ढूंढ रहे हो। अतः दूसरे शब्दों में आपको अपनी समस्या का हल पता है, अपने प्रश्न का उत्तर मालूम है। रोटी की समस्या है, भोजन
का प्रश्न है तो आपने कहा आपको रोज़ी-रोटी चाहिए बोले तो आपने खुद ही उसका हल भी
बता दिया। रोज़ी होगी तो रोटी का प्रबंध भी हो गया समझो। प्रॉबलम तब है कि आपको
अपनी समस्या तो मालूम है आपको अपने प्रश्न तो याद हैं मगर सवालों के जवाब, समस्या के हल के बारे में कोई क्लू नहीं है। आपको खुद तो पता है नहीं आप
सरकार से उम्मीद करते हो कि सरकार अंतर्यामी हो जाये और आपके घट-घट की बात
जाने।
अतः आज से, बल्कि
तुरंत प्रभाव से कोई भी अगर कोई समस्या बताता है।
प्रश्न करता है तो यह भी उसकी जिम्मेवारी होगी कि वह उस समस्या का निदान भी
बताए। अब से ऐसी कोई समस्या को एंटरटेन ही नहीं किया जाएगा जिसमें साथ में
उत्तर/हल न हो। आप बीमार हैं तो उसका इलाज़ भी आपसे बेहतर कौन जानेगा। आपको बारिश
में भीग जाने से ठंड लग गयी है। तो आप ही
इसका हल भी जानते हैं। गरम-गरम चाय
लीजिये। कंबल ओढ़िए। गरम-गरम सूप पीजिए। फिर भी ठंड लगना जारी रहे तो ब्रांडी का
सेवन करें। इसी साइकिल को रिपीट करते रहें जब तक आपकी ठंड दूर न हो जाये या फिर
ब्रांडी पी-पी कर आपको नशा न हो जाये और आप सो न जाएँ। उठने के बाद फिर इसी साइकिल
को रिपीट करें। देखिये कैसे आप दो-चार दिन में एकदम भले चंगे होकर दुबारा भीगने को
तैयार हो जाएँगे। एक कहावत है ‘अगर आप ड्रिंक करते हो तो आपको नशा होता है,
आपको नशा होता है तो आप सो जाते हो, आप सो
जाते हो तो पाप नहीं कर पाते हो और जो पाप नहीं करते वे स्वर्ग जाते हैं । अतः
ड्रिंक करो और स्वर्ग जाओ।
पता आपको सब है बस आप को सरकार से सवाल कर के
सरकार को असहज करने की आदत पड़ गयी है। अब ऐसे नहीं चलेगा। आपको खुद ही हल भी बताना पड़ेगा। आप वो गाना
नहीं सुने हैं “तुम्ही ने दर्द दिया है तुम्ही दवा देना... ग़रीब जानकर दिल से न
भुला देना” देखिये हमने तो भुलाया नहीं बल्कि आपकी समस्या को सिम्प्लीफाई करने को, आपकी समस्याओं के हल खोजने को कितनी
‘आर एंड डी’ सतत करते रहते हैं। समझो कोई परीक्षा का पेपर लीक हो गया है तो
उसका उत्तर/हल भी तो आपने ही देना है। जैसे कि इस एक्ज़ाम को दुबारा लिया जाये। जब
ये परीक्षा देनी होगी, तो भी तो दोगे तो आप ही। अतः आप देश
के ज़िम्मेवार नागरिक होने के प्रमाण दें और आगे से जब भी कोई समस्या/कोई प्रश्न आप
उठाएँ बी श्योर कि आप हल, उत्तर, जवाब
भी दे रहे हैं और हाँ जवाब, जवाब जैसा दीजिये। ना कि कोई फेंटास्टिक जवाब देने लग जाएँ। अब कोई मंगल
ग्रह से एलियन तो आयेगा नहीं आप में से ही किसी न किसी को हल करने वाली टीम
में लगाया जाएगा। अब अगर वो भी कमबख्त
पहले वालों जैसा निकल गया तो इसका क्या हल है? बताओ? नहीं... नहीं आप तो बताओ? आप ऐसे भाग नहीं सकते।
दुष्यंत कुमार तक ने कहा:
“सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए”
देखिये हमें पता है इसीलिए हम तस्वीर
अदलते-बदलते रहते हैं। शुक्रवार के
शुक्रवार फिल्म बदल देते हैं । ओ टी टी प्लेटफॉर्म पर नयी-नयी सीरिज लाते हैं ताकि तस्वीर मुसलसल बदलती रहे।
अब और क्या बच्चे की जान लोगे?
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