Ravi ki duniya

Ravi ki duniya

Monday, August 24, 2026

व्यंग्य: पुलिस प्लीज़ और थैंक यू


    खबर ये है कि पुलिस को निर्देश दिया गया है कि वह प्लीज़ और थैंक यू बोला करे। बार-बार बोला करे। हर बार बोला करे। हमारे स्कूल में एक पाठ हुआ करता था 'ऑन सेयिंग प्लीज़' इस पाठ में प्लीज़ कहने के फायदे और प्रभाव बताए गए थे। कहते हैं कि जनता बहुत सहमी-सहमी और डरी हुई है कि ये क्या नया स्यापा है। बिना प्लीज़ और थैंक यू कहे  पुलिस का प्रेम हमने जंतर मंतर पर देखा है। हम सोच रहे हैं कि पुलिस अब डंडा मारते वक़्त कहेगी "प्लीज़ सिर्फ चार डंडे मारने दो तुम जंतर-मंतर  क्या अपना नाम तक भूल जाओगे" थैंक यू कहते-कहते दो डंडे मार ही तो दिये। यूं तो एक कोई फिल्म थी जिसमें में छोरी छोरे ने कही थी “प्यार में ना  सॉरी न  थैंक यू” पर तू मन्ने ये बता मेरे से कसम ले ले प्यार तो दूर मैं तो तन्ने जानू भी नहीं। अब तन्ने प्यार व्यार हो तो तेरी तू जाने मन्ने बैरा कोई नहीं। । सो थैंक यू और प्लीज़ ने तो किनारे राख़ दे और मेरी बात कान खोल के सुन।


     फर्ज़ करो आप सड़क पर खड़े हो और एक विद्वान विनम्र शीलवान पुलिस का सज्जन पुरुष जिसके नेम प्लेट नहीं लगी है वह आपके पास आता है। वह 'फाइबर' का डंडा आपके पृष्ठ भाग में  लगभग ठेलता हुआ पूछता है "प्लीज़ बताओ! तुम यहाँ क्यों आए हो? क्यों खड़े हो? तू कहीं कोई चोरी-डकैती की प्लानिंग तो नहीं कर रहा? अगर कर रहा है तो प्लीज़ मुझे बताओ! मैं तन्नै ढेर सा थैंक यू, प्लीज़ दे दूंगा। जितना तू कहै।  प्लीज़ अगर तुम नहीं बताओगे तो सोच लो! मैंने अपने लट्ठ में आज  तेल भी लगाया है। प्लीज़ इससे पहले कि मैं अपनी पैलट गन निकालूँ और तेरे दीदे फोड़ दूँ यहाँ से प्लीज़ तिड़ी हो जा। जंतर-मन्तर क्या? दिल्ली में भी कहीं प्लीज़ दिख मत जाना। नहीं तो प्लीज़ मुझे खुद नहीं मालूम मैं क्या कर बैठूँ। थैंक यू। इसलिए मुझ पर दया करो और मुझे प्लीज़ मजबूर मत करो कि मैं मारते-मारते तेरा भुरकस निकाल दूँ। प्लीज़ बात की नज़ाकत को समझा करो। ऐं रे तू तो पढ़ा लिखा सा लागे है? फेर यहाँ के कर रहा सै? घर जा! और कतई निकड़ियो मत ना। तू निकड़ा तो सोच ले प्लीज़ ये तेरी अंतिम यात्रा ही न बन जाये। थोड़े कहे को बहुत समझियो प्लीज़। नहीं तो मैं नहीं जानता हाँ! प्लीज़ समझा कर! या कि लगाऊँ चार डंडे ? फर्ज़ करो कहीं चौराहे का सीन है। आप अपनी मस्ती में चले जा रहे हैं। बाइक पर हेलमट बस सिर पर टोकरी की तरह रखा भर है। दिल्ली पुलिस के सज्जन हवलदार ने आपको रोक लेना है जो आपको पेड़ की आड़ की वजह से दिखा ही नहीं था। प्लीज़ अपना हेलमट कस कर बाँधिए प्लीज़। मन ही मन वह 'फाइन' की रकम और इसके एवज में फाइन को निरस्त करने की रकम जोड़ता जा रहा है। आप तेज़ चला रहे थे। बाइक के कागजात, आर. सी., पाॅल्यूशन दिखाएँ। पेट्रोल कौन सा डलवाते हैं ? जो इतना तेज़ दौड़ाए लिए जाते हो। बता दो प्लीज़ हम भी अपनी गाड़ी में डलवाएंगे। ससुरा हर जगह लेट ही पहुँचते हैं। थैंक यू। प्लीज़ बता दो। और आप कुछ बोलें तब तक दो डंडे आपके रसीद हो चुके होते हों। अब आपकी घिग्घी बंध जाना स्वाभाविक है। प्लीज़ तनिक इतै कू मर ले। थैंक यू। साइड हो जा प्लीज़ बावड़ी बूच। कै मेरी नौकरी ही खाएगा प्लीज़। प्लीज़ तनै मैं थाने ले गया तो नू बैठा ले अपने दिमाग में कि मैंने तैने खूब ही सूतना है। आई बात समझ में प्लीज़। आयी की ना? आ गई हो तो थैंक यू।


अब पुलिस आपको पीटेगी भी और प्लीज़ और थैंक यू भी बोलेगी। क्या सीन रहेगा। प्लीज़ आपके तो खून ही आ गया। प्लीज़ ये खून तो बंद ही नहीं हो रहा। प्लीज़ आप हमारे साथ चलें। थैंक यू! हमें आपको प्लीज़ हवालात में रखना पड़ेगा। हम आपको यूं खुल्ला नहीं छोड़ सकते प्लीज़। आखिर हमारा भी नागरिकों के प्रति कोई कर्तव्य है। थैंक यू। हमें अपना कर्तव्य निभाने दें नहीं तो आपने ही कहते फिरना है पुलिस अपनी ड्यूटी नहीं करती। यह कहते-कहते दो डंडे और मार ही तो दिये। मेरा प्लीज़ और थैंक यू आप तक पंहुचे। स्वीकार करें या भेजूं दो हवलदार तेरे घर? भय बिनु प्रीत नाहिं गोसाईं।  

 

  

No comments:

Post a Comment