सारे जतन कर के देख लिए, नौकरी की परीक्षा हो,
शिक्षा की परीक्षा हो, पेपर लीक हो ही जाता
है। पेपर लीक न हो इसके लिए क्या क्या कोशिशें नहीं की गईं। मगर पेपर है कि लीक हो
ही जाता है। दरअसल हमारी भारत की पावन भूमि की जलवायु ही ऐसी है कि पेपर को बिना
लीक कराये रखना नामुमकिन हो गया है। बड़े से बड़ा अधिकारी हो, अध्यापक
हो, सभी इसी में मुब्तला मालूम देते हैं।
लीक व्याप्त
देश में जित देखूँ तित लीक
लीक रोकन मैं
गया मैं भी हो गया लीक
मुझे हार्दिक खुशी हुई जब पता चला कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान के अंतर्गत अब
सभी परीक्षाएँ यथा नीट, सी. बी.एस.ई. स्टाफ सलेक्शन
और यू.पी.एस.सी. सब की सब का ग्लोबल ठेका मंगल ग्रह की एक एजेंसी को दे दिया गया
है। उनकी उड़न तश्तरियाँ बोले तो यू.एफ.ओ. का इस्तेमाल किया जाएगा। वैसे देखा जाये
तो अब वे यू. एफ.ओ. रही कहाँ अर्थात 'अनआइडेंटिफाइड' कहाँ रहीं? अब तो हम भारतीयों की कुशाग्र बुद्धि ने
उनको ना केवल आइडेंटिफ़ाई कर लिया है अपितु काम पर भी जोत दिया है। 'मिस यूनिवर्स' एक 'मिसनोमर'
है। भाई जब सब सुंदरियाँ पृथ्वी से ही हैं तो यूनिवर्स तो बस नाम का
हुआ। जैसे आजकल स्कूल अपने नाम के आगे 'इन्टरनेशनल' लिखने लग पड़े हैं। अब जब कमान मंगल ग्रह की एजेंसी के हाथों में रहेगी तो
पेपर लीक हो कर बताए।
इस श्रंखला में मंगल ग्रह वालों ने एक
एस.ओ.पी. दिया है। हमें उसका आई.एस.ओ. की तरह पालन करना होगा। कुछ हाईलाइट्स
प्रस्तुत हैं:
1. पेपर मंगल ग्रह से ही बन कर आयेगा।
जितनी भाषाओं में चाहिए वे खुद ही ट्रांसलेट करेंगे। देखा ये गया है कि ट्रांसलेशन
स्टेज पर पेपर लीक होने की संभावना रहती
है। अब हो सकता है लीक कहीं और किसी और ने किया हो और बेचारे गरीब ट्रांसलेटर के
सिर दोष मढ़ दिया जाता हो
2. पेपर बना कर सीधे अरेबियन सी अथवा बंगाल
की खाड़ी या हिन्द महासागर में मंगल यान से आयेगा। कहां आयेगा ये बात अंत तक
सीक्रेट रखी जायेगी। आई.एस.टी. अनुसार किस समय और तारीख को आयेगा ये क्रिपटिक भाषा
में कोड वर्ड में बता दिया जाएगा।
3. पेपर को तुरंत भारतीय सबमरीन में नेवी
द्वारा निकटतम आर्मी स्टेशन लाया जाएगा
4. आर्मी स्टेशन में वायु सेना का विमान
रन-वे पर इंजन चालू हालत में रखे खड़ा होगा। तुरंत से पहले वह वायु सेना का विमान
पेपर्स ले उड़ेगा। सेंटर की तरफ नहीं बल्कि जिस शहर जाना है उसके अपने आर्मी केंट
में।
5. वहाँ से टैंक और बख्तरबंद गाड़ियों में
इसे सेंटर तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए एक डेडीकेटिड रूट पहले से लगा दिया जाएगा
जैसे आजकल 'दिल' को ट्रांसप्लांट को
लाते ले जाते हैं ताकि रास्ता साफ मिले और स्पीड से समय रहते पहुंचाया जा
सके।सावधानी के तौर पर पूरे रुट पर कर्फ्यू रहेगा और 'शूट एट
साइट' लागू रहेगा।
6. इस सब की निगरानी को 'रियल टाइम' में हमारे इसरो द्वारा विकसित उपग्रह ऊपर
से चौकस निगरानी रखेंगे ताकि जरा भी कहीं 'डेविएशन' ना होने पाये। आपने बहुधा अंग्रेज़ी फिल्मों में देखे होंगे ऐसे सीन।
7. मंगल यान उतरते के साथ ही वहाँ हेंड
हेल्ड टारपीडो गन लेकर अपने पानी के अंदर पहने जाने वाले स्पेशल सूट में 'साल्सा' तैनात रहेगी। नहीं समझे ? स्पेशल एंटी लीक स्क्वैड
8. यह पूरा प्राॅसीजर प्रयोगात्मक तौर पर
किया जाएगा और माॅक ड्रिल आयोजित की जाएंगी। जिसे एक कमेटी ऑब्जर्व करेगी।
9. स्टॉप वाच से मिनट और सेकन्ड का हिसाब
रखा जाएगा। कहाँ किस स्टेज पर 'बाॅटलनैक' है कोई और अडचन है उसको रेक्टिफ़ाई किया जाएगा। बस यूं समझो इतना तो
केंडीडेट परीक्षा देने की तैयारी नहीं करेगा जितनी हम परीक्षा लेने की करेंगे।
10. इतनी सब सावधानियाँ बरतने के बाद भी
अगर पेपर लीक हो गया ) आपने जेम्स बॉन्ड की फिल्मों में देखा होगा कैसे पानी के
अंदर से ही पूरी की पूरी यूरेनियम की खेप या फिर ऑटोमिक बम्ब को दूसरी पार्टी ले
उड़ती है आई मीन ले तैरती है। अतः हमने अपने विकल्प खुले रखे हैं हम अगली बार अन्य
ग्रहों को भी अवसर देंगे ताकि कोई हम पर मंगल ग्रह पर 'अननेसेसरी'
फ़ेवरटिज्म का आरोप ना लगा सके। इसके लिए अलग-अलग ग्रहों पर हमारे
शिष्ट मण्डल गए हुए हैं। वीनस, जुपिटर और और यूरेनस वालों से वार्ता चल रही है।
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