Ravi ki duniya

Ravi ki duniya

Wednesday, August 26, 2026

पतंग मेरी

 

कितने रंग भरे थे सपनों मे हम-तुमने

पता नहीं कब में हो गई ज़िंदगी बेरंग मेरी

कभी ज़ुल्फ बिखरा, कभी पलकें झुका

मुस्कराने भर से जीती तुमने मुझी से जंग मेरी

साँस लेने पे न जा, मेरे मुस्कराने पे न जा

ये पूछ कहाँ खो गयी वो ज़िंदादिल उमंग मेरी 

मैं अकेला कब था तेरी कायनात मे ?

बदनामी, नाकामी रही सरे-राह संग मेरी

मैं तुम्हारे इस खेल में शामिल न था

तुमने ढील देकर काटी है पतंग मेरी

No comments:

Post a Comment