Ravi ki duniya

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Monday, January 5, 2026

व्यंग्य : रेट कार्ड रिश्वत का

  

 

मेरे भारत महान के एक महान सूबे में एक दस साला सर्विस के प्रशासनिक अधिकारी ने लॉ एंड ऑर्डर स्थापित करते हुए उन्होंने अपने ऑफिस  की कार्यप्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन किया है। बल्कि सुधार किया है और व्यवस्था स्थापित की है। जिसके लिए यह प्रशासनिक अधिकारी को दिल से सलाम है। किसी भी ऑफिस में अथवा संगठन में अनिश्चितता एक बड़ी बीमारी है। इस भाई ने वही प्रणाली ठीक की है। दुरुस्त कर के चाक-चौबन्द कर दी है। उन्हें जो भी बड़े से बड़ा पुरस्कार हो वह उसका हक़दार है। मुझे बहुत दुख: हुआ जब पता चला कि इनाम-इकराम तो भाड़-चूल्हे में गया अगले के छापा मार के घर-ऑफिस से धन-संपति ज़ब्त कर ली। गिरफ्तार अलग कर लिया है।

 

अब कोई अधिकारी क्यों किसी व्यवस्था को सुधारने की सोचेगा। भाईसाब ने जब जॉइन करते ही देखा कि सुविधा शुल्क (रिश्वत) का कोई ठीक ही नहीं है किसी से कुछ राशि, किसी से कुछ राशि। कोई रिलायबिलिटी ही नहीं। पता नहीं अधिकारी अथवा बाबू या कोई और कारिंदा कितना मुंह फाड़ ले। इससे ऑफिस की साख गिरती है। ऑफिसर की साख गिरती है। जिसे रोकना बहुत ज़रूरी था। रियाया का 'फेथ' सरकार के इक़बाल में बने रहना चाहिए। यह भी तो अधिकारियों का ही काम है। बल्कि मैं तो कहूँगा यह उनकी सर्वोच्च ड्यूटी है। बस वही काम तो ये बेचारा अधिकारी कर रहा था। उसने सोचा भी न होगा कि उसके इतने अच्छे काम का यह सिला मिलेगा।

 

अधिकारी महोदय ने रात-दिन जाग-जाग कर पूरे सिस्टम को स्टडी किया और इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि ये सब इसलिए है कि रेट-कार्ड फिक्स नहीं है। बस फिर क्या था उन्होंने आनन-फानन में एक रेट-लिस्ट बनाई और स्टाफ का पूरा-पूरा ध्यान रखा गया। आखिर ऑफिस का काम एक टीम वर्क है। अतः टीम के सभी सदस्यों का ध्यान रखना होता है। आप इस रेट-लिस्ट पर एक नज़र डालें:

 

           सुविधा शुल्क (रिश्वत) का रेट (कृषि भूमि को ग़ैर कृषि में कन्वर्ट करने का) दस रुपये प्रति वर्ग मीटर रहेगा (ऑफ कोर्स ! अगले रिविज़न तक)  इस प्रकार से प्राप्त राशि का डिस्ट्रीब्यूशन इस प्रकार रहेगा (अगले आदेश तक):

 

 

1.       कलैक्टर (वे स्वयं)  50%                 

2.       अपर कलैक्टर       25%                 

3.       मामलतदार           10%                       

4.       उप-मामलतदार     10%                    

5.       लिपिक                 05%                                 

 

 

एजेंसी प्रथम द्य्ष्ट्या इस मामले में वित्तीय आंकलन लगभग 1500 करोड़ का बताया गया है। देखिये मेरे भारत महान में ऐसे लाखों नहीं तो हज़ारों हज़ार ऑफिस हैं। सोचो ! कितना राजस्व इस अधिकारी की वजह से उत्पन्न हो रहा था। अब देखो तो ये समस्त राजस्व भारत में ही रहने वाला है। यह हमारा सरमाया है। दो-चार दिन में यह अधिकारी पुनः अपनी फुल फाॅर्म में देश हित में राजस्व बढ़ाने में अपने  तन-मन-धन से सहयोग करने में जुट जाएगा।

 

शर्म हमको मगर नहीं आती।