बरसों पहले बिछुड़ने के बाद कैसे मिले हम आज
तुम क्या जानो ये राज़
तेरी गली की दिशा में सिजदा कर
हमने हरदम दुआ की तुझसे मिलने की
मेरी मक्का तू, मेरा मदीना तू
मेरा मरना तू, मेरा जीना तू
देख तेरा इश्क़ किस मुकाम पर ले आया मुझे
फर्क ही मिट गया जीने-मरने का
मेरी दुआ बेअसर साबित न हुई
मेरा अपना सलीका था दुआ का