Ravi ki duniya

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Friday, July 17, 2026

संस्मरण: जे.एन. मार्शल


                                     


 

राजस्थान के कोटा रेलवे जंक्शन स्टेशन के समीप माला रोड पर खाली भूमि के दलदली टुकड़े ने हमेशा मुझे एक लावारिस से, क़ानूनी दांव-पेच में फंसे भूखंड की छाप दी, जैसे ये जल्दबाजी में त्याग दिया गया था। टूटे हुए शेड, अस्थायी ढांचे और जगह-जगह बेतरतीब ढंग से बढ़ रही घुटने तक की घास। मैं 1980 के दशक में कोटा में.पदस्थ था और मेरा सरकारी आवास समीप ही था। पूछने के बाद भी मुझे इसके बारे में स्पष्ट रूप से कोई नहीं बता सका। वे बस वही खुलासा करते थे जो वे जानते थे बल्कि उनके बुजुर्गों द्वारा जो बताया गया थे। "ओह! कोई अंग्रेज ने कंप्रेसरों का एक कारखाना कभी स्थापित किया था..." एक दिन मैंने खुद पता लगाने का फैसला किया, भूमि के दलदली भूखंड के बारे में नहीं बल्कि जे. एन. मार्शल के खुद के इतिहास के बारे में।

 

जे. एन. मार्शल का पूरा नाम जहांगीर नौशेरवानजी मार्शल था। वह अंग्रेज नहीं, एक पारसी थे। उन्होंने 1926 में अहमदाबाद में व्यापारिक कंपनी की स्थापना की, जो बाद में बहुराष्ट्रीय इंजीनियरिंग और भाप के साजो-सामान/ समाधान के समूह में विस्तारित हुई। बाद में इस फर्म को उनके भतीजे डेरियस मिनोचर फोर्ब्स द्वारा इसे विनिर्माण और कॉर्पोरेट रूप में विकसित किया गया था।

 

1946 में डेरियस एम फोर्ब्स अपने चाचा जे. एन. मार्शल के साथ शामिल हो गए और उन्होंने विभिन्न ऊर्जा बचत भाप उपकरणों के साथ-साथ आयातित बॉयलरों का व्यापार शुरू किया। 1957 में भारत में विदेशी मुद्रा भुगतान संकट आया और सरकार ने जे. एन. मार्शल के आयात लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया। आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता निर्माण करना था। इसलिए, पहला कारखाना कासरवाड़ी, पुणे में स्थापित किया गया था और विनिर्माण 1959 में शुरू हुआ था। दूसरी इकाई 1985 में हैदराबाद में विनिर्माण गेज के लिए स्थापित की गई थी। तीसरा कारखाना 1986 में पुणे के पास पिंपरी में नियंत्रण उपकरण के निर्माण के लिए स्थापित किया गया था।

 

आज 'फोर्ब्स मार्शल' नाम की कंपनी व्यवसाय को अपनी ऊर्जा और प्रक्रिया दक्षता में सुधार करने और अधिक पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार होने में मदद करने के लिए अभिनव समाधान प्रदान करती है, उनके ग्राहक भारत, उत्तरी और दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका, मध्य पूर्व, दक्षिण पूर्व एशिया और यूरोप में फैले हुए हैं।

1991 में अर्थव्यवस्था के खुलने के बाद, उन्हें व्यापार में बने रहने के लिए वैश्विक कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने की आवश्यकता थी, विश्व मानकों के उत्पादों का निर्माण करना था। 1992 में श्रीलंका को बिक्री की गई थी। 1998 में श्रीलंका में एक कार्यालय खोला गया था।

 

आज उनके पास ब्रिटेन और सिंगापुर में दो विनिर्माण इकाइयां हैं और भारत में चार इकाइयां हैं। दुनिया भर में 8000 ग्राहकों की ज़रुरतों को संतोषजनक तरीके से पूरा किया जाता है। आज इस कंपनी का वार्षिक टर्न ओवर 1500/- करोड़ है। मुझे चाचा जे. एन. मार्शल का कोई चित्र पब्लिक डोमेन में नहीं मिला। अत: उनके भतीजे डेरियस फोर्ब्स की तस्वीर साझा की है जिनका 97 बरस की आयु में 11 अगस्त 2023 को निधन हुआ।

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