ये जो चीला है जिसे लोग बतौर नाश्ता और
रिफ्रेशमेंट खाते हैं कमाल की चीज़ है। कमाल ये है कि ये अभी तक चल रहा है, सरकार ने इस पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है। ये बात समझ से परे है। भई!
ऑमलेट खाना है तो ऑमलेट खाओ सीधे-सीधे। फिर किसी ने बताया चीला का आविष्कार ही
किसी वेजिटेरियन ने किया होगा। जैसे फिल्मों में 'डबल'
होते हैं, सिने-तारिकाओं के 'लुक एलाइक' होते हैं कुछ-कुछ वैसे ही। इसे खाते वक़्त
वेजिटेरियन लोग भी ऑमलेट की फेंटेसी ले सकें। अतः चीला ऑमलेट वालों को फेंटेसीलैंड
ले जाने का साधन/वाहक है। ऑमलेट जैसा दिखता है पीला-पीला, ऑमलेट की तरह ही धनिया/प्याज़
डालिए और हूबहू ऑमलेट की तरह लपेट कर प्रजेंट कर दीजिये। चीला के फैन लोग की बांछे
खिल जाती हैं। वे इसे खा कर वैसे ही खुश हो जाते हैं जैसे वेजीटेरियन लोग चिकन
लाॅली-पॉप नहीं खा सकते अतः उनके लिए आविष्कार किया गया सोया चाॅप का। वैसे ही
दिखता है, वैसे ही पकड़िए बस ये है कि ये मुर्गे की टांग नहीं
आइसक्रीम की डंडी है। बताते हैं सोया चाॅप सेहत के लिए बहुत हानिकारक है, इसमें कई खाद्य-अखाद्य वस्तुओं की मिलावट होती है। जिसे केवल सोया चाॅप
बनाने वाले ही जानते हैं। यूं तो आजकल चिकन
भी इंजेक्शन लगे मिल रहे हैं आपको पता ही नहीं आप चिकन खा रहे हैं या रबड़ या
प्लास्टिक और ये सब चिकन की प्रजाति ब्राॅयलर के नाम पर।
इतना काफी नहीं है। चीला मुख्यतः बेसन का बनता है। अब कोई पूछे भाई बेसन ही खाना
है तो क्यों न उसके गरमागरम पकौड़े बना कर खाये जाएँ। अब तो लगभग हर चीज़ का पकौड़ा
बन जाता है। दिल्ली में एक ‘खानदानी’ पकौड़ेवाला है, जहां
पकौड़े के खानदानी प्रेमी लोग पकौड़े खाने आते हैं। उसे हर चीज़ का पकौड़ा बनाने में
महारत हासिल है। करेला, कमल- ककड़ी, बैंगन,
आलू, प्याज, गोभी,
पनीर। गोया कि आप उसे कुछ भी दे दें वह उसे पकौड़े में तब्दील कर
देगा। मुझे कोई बता रहा था कि लखनऊ में आइसक्रीम का पकौड़ा भी होता है। चीला एक
अद्भुत आविष्कार है। इसके प्रेमी इसे फास्ट-फूड बताते हैं। बस तवा चूल्हे पर रखिये
बेसन घोलिए और उंडेल दीजिये। धनिया-प्याज अगर खाते हों, छिड़क दीजिये डोसे की तरह जो
अगड़म-झगड़म डालना है डाल दीजिये। हो गया चीला तैयार।
इस पर बस होता तो गनीमत थी। तुर्रा ये कि
चीला बेसन का ही नहीं मैदे का (उत्तपम के माफिक) मूंग की दाल का भी बनता है। कोई
कैसे तो चीला को पसंद करे! चीला खाये!
ऑमलेट कनवेंट शिक्षित है। चीला टाट-पट्टी के हिन्दी मीडियम पाठशाला की
पैदाइश है। चीला ऑमलेट का 'फेक-नेरेटिव' है। चीला में कितने परसेंट कौन सी विटामिन है, कितना
प्रोटीन है इस पर अनुसंधान की ज़रूरत है। कई बार लगता है यह चीला कहीं सिंधु घाटी
की सभ्यता अथवा हड़प्पा की खुदाई में न मिला हो। इसे कहीं राष्ट्रीय अल्पाहार न
घोषित कर दिया जाये। जैसे लिट्टी-चोखा, दाल बाटी-चूरमा,
सत्तू, की श्रंखला में। चीला है किस प्रदेश का
? लगता है किसी के घर में बेवक्त मेहमान आए, बनाने को कुछ था नहीं अतः बेसन का घोल बना कर तवे पर उंडेल दिया और सर्व
कर दिया। हम लोग आज तक 'सफर' कर रहे
हैं। इसके प्रेमी इसके गुण गिनाते नहीं अघाते। बचपन में हमारे माँ-बाप भी पालक के
गुण गिनाते थे। हमें लगता, न शक्ल, न
सूरत न कोई स्वाद कोई समझदार आदमी पालक कैसे खा सकता है। जबकि हमारे नाना-दादा
कटोरे के कटोरे खाली कर देते थे।
मेरे यहाँ कढ़ी भी बड़े चाव से बनाई और खाई
जाती है। जिस दिन कढ़ी बनती है उस दिन किचन में फुर्ती और कंस्ट्रेशन देखने लायक
होती है। गहमागहमी देख मैं अंदाज़ लगा लेता हूँ 'बेटा!
आज कढ़ी मिलेगी खाने में'। तो हुज़ूर आप चीला पार्टी से हैं
या इसके विरोधी हैं। सुना नहीं तुम्हारा 6 मेरा 9 हो सकता है।
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