Ravi ki duniya

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Sunday, April 26, 2026

ममता दीदी-मेनका गुरुस्वामी ज़िन्दाबाद !

 

ममता दीदी द्वारा डेरेक ओ' ब्रायन तथा मेनका गुरुस्वामी  को राज्यसभा के लिए भेजने की खबर एक बहुत ही अच्छी पहल है। आपको याद होगा डेरेक भाई कभी टी.वी. पर क्विज़ मास्टर के बतौर आते थे। प्रसंगवश इनके पिता नील ब्रायन भी न केवल एक सफल  क्विज़ मास्टर बल्कि एंग्लो इंडियन कोटा से लोकसभा के सदस्य रहे।  डेरेक एक सफल एंकर रहे हैं। हिन्दी से अधिक अंग्रेजी में धारा प्रवाह वक्ता। उनके क्विज़ शो मनोरंजक और ज्ञान वर्धक होते थे। इसके अलावा वे एंग्लो-इंडियन समुदाय से हैं। 2014 से पहले संविधान के प्रावधानों के तहत दो एंग्लो इंडियंस को राष्ट्रपति लोक सभा में नामित करते थे। फ्रेन्क एंथोनी प्रसिद्ध शिक्षाविद् और एडवोकेट  बरसों-बरस  लोक सभा के एंग्लो इंडियन समुदाय से सदस्य रहे। वे संविधान सभा के सदस्य भी रहे थे।  उनके द्वारा स्थापित फ्रेंक एंथोनी पब्लिक स्कूलों की श्रंखला दिल्ली, बंगलोर, कोलकाता आदि प्रमुख शहरों में सफलता पूर्वक आज भी चल रहे हैं। डेरेक ब्रायन एंग्लो-इंडियन हैं और  मुख्यमंत्री ममता दीदी ने  एक इंक्लूजिव सियासत का उदाहरण दिया है। यूं डेरेक प्रभावशाली ढंग से राष्ट्रीय और बंगाल के मुद्दों को उठाते रहे हैं। वे एक प्रखर वक्ता हैं इसमें कोई संदेह नहीं। वे निश्चय ही टी.एम.सी. के लिए एक 'असेट' हैं।

 

 

इसी के साथ मेनका गुरुस्वामी, ऑक्सफोर्ड और हारवर्ड शिक्षित एक सफल एडवोकेट हैं और प्रमुख केसों को प्रभावशाली ढंग से उच्चतम  न्यायालय में लड़ती रही हैं। हम भारत में जब तक किसी को अपने मन में बनाए 'बॉक्स' में फिट नहीं कर लेते बेचैन रहते हैं मसलन ये सामने वाला (जिसकी बात भी हो रही हो तो) वह किस प्रदेश से है, किस जाति/धर्म का है, कहाँ का और कहां तक पढ़ा लिखा है, इसके और संदर्भ बिन्दु कौन से हैं (नेगेटिव वाले मिल सकें, तो और बेहतर है) इससे हमें अपने मन में बनाए पूर्वाग्रह और दुराग्रहों अनुसार अगले को फिट करने में और 'जनर्लाइज़' करने में सहायता मिलती है। हम कम्फ़र्टेबल फील करते हैं। अतः समाचार पत्र हो या सोशल मीडिया मेनका गुरुस्वामी का जहां नाम आया साथ ही यह भी आया कि वे एल.जी.बी.टी. क्यू. समुदाय से हैं और उनके हितों के प्रबल समर्थक हैं। मित्र लोगों को इतने से कहाँ संतोष था ? वे और गहरे उतरे और ज्ञान के मोती निकाल कर लाये कि वे दरअसल 'लेसबियन' हैं। उनकी पार्टनर का नाम है अरुंधति काटजू। कोलंबिया यूनिवर्सिटी, न्यूयाॅर्क शिक्षित अरुंधति काटजू खुद भी सफल वकील हैं।

 

हमारे समाज में उनकी योग्यता की बात दीग़र पहले उनके इस 'ओरियंटेशन' की बात होगी। ममता दीदी के पास प्रतिभाओं की कमी नहीं है। महुआ मौइत्रा उनमें एक हैं। शत्रुघ्न सिन्हा पता नहीं इन दिनों क्यों उतने मुखर नहीं हैं जितनी उनसे अपेक्षा की जाती है। वे एक तजुर्बेकार और फायर ब्रांड वक्ता रहे हैं।

 

मुझे पूरा यकीन है कि इस प्रकार की प्रतिभाओं से जो 'थिंक टैंक' दीदी बना रही हैं वह निर्णयाक साबित होगा और वे सियासत में 'असेट' बनके उभरेंगे। हम लोग डेफ़िनिटली एक बेहतर बौद्धिक संसदीय विमर्श डिज़र्व करते हैं।


इंतज़ार रहेगा ।

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