Ravi ki duniya

Ravi ki duniya

Sunday, April 26, 2026

व्यंग्य: आइंस्टाईन फाइल और मैं

  

     मैं सोच रहा हूँ अगर आइंस्टाईन फाइल जैसी कोई चीज़ होती तो ये जिस-जिस का भी नाम उसमें होता तो वह कैसे इठलाता फिरता। उसका 'स्वैग' ही अलग होता। क्या आपको लगता है ऐसा आदमी किसी से सीधे मुंह बात भी करता। उसे तो पार्टीज़ और कॉकटेल से ही फुरसत नहीं मिलनी थी। उसके चैनल चैनल इंटरव्यू चल निकलने थे। मित्र और रिश्तेदार अलग ईर्ष्या करते, कुढ़ रहे होते। वह भी हवा में आ जाता और टेर टेर के बताता कैसे उसे आइंस्टाईन के ई-मेल पर ई-मेल आ रहे थे। हे ! आर्यपुत्र हम पर कृपा करें और अपने मुबारक कदम मेरे द्वीप पर रखें और कृतार्थ करें। साहिर साब का एक शेर है ना "... तुझसे मिलना खुशी की बात सही... तुझ से मिल के उदास रहता हूँ...." तो आइंस्टाईन फाइल में मेरा नाम आ जाता यह तो खुशी की बात होती ही होती मगर लोग इस पर 'कंट्रोवर्सी' करने लगते कि इसने खुद तो महज़ हिस्ट्री और हिन्दी पढ़ी है, इस कूढ़ मगज का नाम आइंस्टाईन  फाइल में कैसे ? जब ये नाम इन्द्राज किए जा रहे थे तो हम कहाँ थे ? ये सोच-सोच ना जाने कितने लोग उदास हो जाते होंगे। मैंने भी फिर एक तटस्थ भाव से कह देना था कि मैं दो-चार बार देश की खातिर आइंस्टाईन  से मिला था। मैं आइंस्टाईन से मिलने वाला कोई इकलौता हिन्दुस्तानी नहीं, पंडित जवाहर लाल नेहरू भी आइंस्टाईन से मिले थे। मेरे पास सबूत मौजूद है।

 

                       एक मेरा नाम ई-मेल में आया तो क्या

                      और भी इंडियन आइंस्टाईन फाइल में हैं

 

 

आगे आने वाले टाइम में यह  गौरव की बात मानी जाएगी कि जब दुनिया के वखरे वखरे मुल्क़ के लोगों के नाम, बोले तो ! जब टॉम डिक और हैरी के नाम आइंस्टाईन फाइल में थे तब एक हिन्दुस्तानी गंडा सिंह भी था। यानि मेरा नाम देख कर आपका सीना गर्व से 66 इंची हो जाएगा। 

 

 

यह कोई कम गर्व की बात नहीं होती है कि इत्ते बड़े आदमी की 'मेलिंग लिस्ट' में आपका नाम हो। असल में मैं तो आइंस्टाईन के मोबाइल के 'फास्ट-डायलिंग' पर हूँ। अब ये बात मैं अपने रिश्तेदारों और पड़ोसियों को तो क्या ही बताऊँ। वो तो ईर्ष्या के मारे जल-कुढ़ ही जाएँगे। और लगेंगे अंड-बंड बकने। मेरे भारत महान में कोई थोड़ा ऊपर उठ जाये, किसी को जरा मशहूरी मिल जाये, लोग बाग लग जाते हैं उसकी क़ब्र खोदने। "अजी हम अच्छे से जानते हैं, खाने तक के वांदे थे। अब जरा सा पैसा क्या आ गया सब भूल गए। वो दिन भूल गए जब घर में आए दिन फाके होते थे। कपड़े तक ढंग के नहीं थे अब 'थ्री पीस सूट' पहन कर इतराते हैं। एक कमरे के मकान में पूरा परिवार रहता था। अब फार्म हाउस में रहने लगे हैं तो बातें आ गई हैं।“

 

लोगबाग कयास पर कयास लगाए जा रहे हैं कि मेरे आइंस्टाईन के साथ किस तरह के संबंध थे। अब इन पढे-लिखे मूरखों को क्या बताऊँ ?  जो संबंध पानी के टब से आर्कमिडीज़ का था, जो संबंध सेब का न्यूटन से है वही संबंध मेरा आइंस्टाईन के साथ है।

                               

 नोट : मेरा कोई फोटो आइंस्टाईन अथवा उसके परिवार, एक्स्टेंडिड परिवार के साथ नहीं है। ऐसा कोई भी फोटो प्रकाश में आये तो आप समझ लेना ये ए.आई. का काम है और इसके पीछे विरोधी दल के फ्रस्ट्रेटिड लोग हैं।

 

No comments:

Post a Comment