Ravi ki duniya

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Sunday, April 26, 2026

व्यंग्य: खाड़ी युद्ध और हम !


 

      हमारा देश युद्ध का नहीं बुद्ध का देश है। हम शान्तिप्रिय लोग हैं। हमारा इतिहास गवाह है, हमने कभी किसी देश पर अपनी तरफ से युद्ध नहीं छेड़ा। हम तो वसुधैव कुटुंबकम मानने वाले और इस विचार धारा के पोषक हैं। हमने पाकिस्तान-ईस्ट पाकिस्तान में सन् 1971 में युद्ध को समाप्त  कराया ही था। अभी फिलहाल के दिनों में हमने रूस और यूक्रेन का युद्ध रुकवाया ही था। आपने  सुना नहीं था? जब वो बेचारी लड़की रुआंसी होकर अपने माता-पिता को बता रही थी कि पापा मैं न कहती थी, मोदी जी ने वॉर रुकवा दी। इस तरह वहाँ पढ़ रहे बच्चे सुरक्षित भारत वापसी कर सके थे। आप सब ने देखा होगा जब वे विमान से उतरते वक़्त नारे लगा रहे थे और उनकी अगवानी मंत्री लोग कर रहे थे। यह इसीलिए मुमकिन हुआ कि हम विश्वगुरु हैं। ये नया भारत है। माइंड इट।


अब जब खाड़ी देश में मध्यस्थता की बात आई तो सभी देश भारत की ओर देख रहे थे कि भारत अपने विश्वगुरु के दायित्व को निभायेगा। किन्तु ये क्या भारत ने एक 'नरचरेंट पेरेंट' की भूमिका निभाते हुए कहा कि नहीं हम मध्यस्थता नहीं करेंगे। अब यह मौका किसी और देश को दिया जाये। नहीं तो बाकी देशों का विकास कैसे होगा? हमने इनसिस्ट किया कि हमारे 'इमीजिएट नेबर' पाकिस्तान को यह रोल दिया जाये। आखिर ऐसे ही तो बाकी देश विश्व के मामलों मे रुचि लेंगे और अपनी जिम्मेवारी समझेंगे। अतः हमने यह फैसला लिया है कि हमारा पड़ोसी देश, हमारा छोटा भाई ये रोल अदा करे। हमारे 'नेबर' मजबूत बनें यही हमारा ऑब्जेक्टिव है।

 

                     हमारे पास इतना टाइम नहीं है कि हम इस-उस के फटे में टांग अड़ाते फिरें। हमारे अपने  बहुत काम हैं। सूबों में चुनाव सिर पर हैं। 'वी आर बिज़ी पीपुल'। एक बार हमने डिसाइड कर लिया कि खाड़ी के देश आपस में सुलट लें। पाकिस्तान को अब तलक हमने पर्याप्त रूप से ट्रेनिंग दे दी है। अब वक़्त आ गया है कि वह इंडिपेंडेंट रूप से विश्व क्षितिज पर आए। सभी पड़ोसियों को मजबूत बनाना भी हमारा ही फर्ज़ है। 'क्षमा बड़न को चाहिए'। हम चाहते थे कि पाकिस्तान ये काम करे। हम यूं बांग्लादेश का नाम, या श्री लंका का नाम दे सकते थे मगर दोनों देश में अभी नयी-नयी सरकार बनी हैं। उन्हें अपने  काम करने दीजिये। 'नेबर फर्स्ट' हमारी नीति है। उसी के फलस्वरूप हमने विश्व बिरादरी को कह दिया कि हमें इस बार 'बाॅदर' न करें बल्कि पाकिस्तान को ये काम दो। नहीं तो वो कब सीखेगा? अब हम ठहरे विश्वगुरु हमारी बात कोई टाल सके ऐसा मुमकिन ही नहीं। अतः उन्होने हमारे कहे अनुसार ही ये काम पाकिस्तान को दिया है। और तो और हमें इस का कोई क्रेडिट भी नहीं चाहिए। ये तो बात आई तो ज़िक्र कर दिया। नहीं तो हम अपने मुंह मियां मिट्ठू नहीं बनते। न कोई नारेबाजी, न कोई एडवरटाइज़मेंट ना कोई फोटोग्राफ। भैया ! आप मुंशी प्रेमचन्द की 'बड़े भाई साब' पढ़े हैं कि नहीं? बस हम वही बड़े भाई साब हैं।

 

 

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