सयाने
कह गए हैं हर अपराध के पीछे तीन चीजों में से एक न एक का हाथ होता है: जर, जोरू, ज़मीन। आजकल जैसा सब कुछ चल रहा है अखबार के
अखबार भरे पड़े रहते हैं ऐसे ही न्यूज चैनल एक के बाद एक खबर देते रहते हैं जैसे
कोई कंपटीशन सा चल रहा हो। अब प्रिये! मेरी समस्या ये है कि मुझे साँपों से बहुत
डर लगता है। साँप तो साँप मुझे तो केंचुए से भी डर लगता है। अतः तुम कुछ भी करना
पर वादा करो तुम मुझे साँप से नहीं डसवाओगी। सुनते हैं जब साँप डस लेता है तो ज़हर
से पूरा जिस्म नीला पड़ जाता है। वैसा ही नीला जैसा नीला प्लास्टिक ड्रम होता है।
अब मैं नहीं चाहता कि मेरा जिस्म नीला पड़े। पहले ही मेरा रंग काला बोलो, सांवला बोलो है। नीला होकर तो और भी ना जाने कैसा-कैसा लगेगा। भले तुम्हें
साँप और सपेरे आराम से 'ईजीली' मिल
जाएँगे। पर देखो मेरी आखिरी इच्छा यही समझो कि मुझे साँप से मत डसवाना। सिर्फ
इसलिए कि मुझे साँप से डर लगता है बहुत डर लगता है। हो सकता है सांप को देखने
मात्र से ही मेरा दम निकल जाये। कहावत है न जब गुड़ से मरता हो तो ज़हर क्यों दिया
जाये।
अब तुम अगर ये सोचो कि तुम मुझे किसी पहाड़ पर
ले जाने का प्लान बना रही हो जैसे कि नॉर्थ ईस्ट के इलाके में होते हैं। पर प्रिये
! मुझे हाइट्स से डर लगता है। बोले तो मैं वर्टिगो से ग्रस्त हूँ। अक्रोफोबिया है
मुझे। हाइट्स पर जाने का दूर हाइट्स का नाम सुन कर ही जी मिचलाने लगता है। मुझे
चक्कर आने लगते हैं। अतः हे प्रिये! मुझे कभी पहाड़ पर ले चलने का ज़िक्र भी मत कर
देना। और सुनो प्रिये! मुझे इन पुराने किलों और महलों में भी कोई रुचि नहीं है।
मैं अपने टू बी.एच.के. के क्वाटर में बहुत खुश हूं। अतः प्लीज़ मुझे कभी किसी भी क़िले
या महल ले जाने की ज़िद मत करना। जब भी तुम इसका ज़िक्र भर करोगे मेरा जिस्म सुन्न
पड़ जाएगा। जाना तो दूर मैं इन भूतहा किलों का नाम सुन कर ही सहम जाता हूं।
अब आजकल ये छुरी-चक्कू बोलो, तमंचा-कट्टा बोलो आसानी से सुलभ हैं। इनको चलाने वाले भी आजकल बहुत सस्ते
में मिल जाते हैं। एक ढूंढो हज़ार मिलते हैं दूर ढूंढो पास मिलते हैं। फिल्मों-
सीरियलों में गोली चलते, गोली लगते देखना एक बात है मगर मेरे
को गोली लगे सुन कर ही पसली में सिहरन दौड़ जाती है। मैं जानता हूँ अगर एक बार तुम
ठान लो तो ऐसी कोई बुलेट प्रूफ जैकेट नहीं बनी जो मुझे तुम्हारी बुलेट से बचा ले।
निष्कर्ष यही छोटा सा है प्रियवर कि जब तुम्हारा
मन मुझ से ऊब जाये तो बस कह भर देना मेरा दर खुला है खुला ही रहेगा। असल में जान
है तो जहान है। जान सलामत रहे जाने-मन बहुत मिल जाने हैं। जब जान ही नहीं रहेगी तो
काय बात की जाने-मन? तुम बेशक सातों वचन भुला दो
वांदा नहीं। बस तुम तो मेरा यही एक वचन,
मेरे लिये निभाने का वादा
करो कि जब तुम्हें किसी भी स्टेज पर ऐसा लगे कि अब बस हो गया तो मुझे बता भर देना।
मनी बैक गारंटी की तरह ये दूल्हा बना माल वापिस हो जायेगा। भूल चूक लेनी देनी।
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