यह तय पाया गया है कि तुरंत प्रभाव से पुलिस सुबह- सुबह पार्क के दरवाजे पर
खड़ी रहा करेगी और हर वॉक करने आने वाले और सुबह की सैर करने वालों को गुड मॉर्निंग
कह कर उनका अभिवादन करेगी और उनमें एक विश्वास और समाज में सुरक्षा का भाव पैदा
करेगी। यह सुन कर नागरिकों में खासकर मॉर्निंग वाॅकर्स में एक अज़ब भय व्याप्त हो
गया है। कई ने तो मॉर्निंग वॉक पर जाना ही छोड़ दिया है। पता चला अब उनको डर है कि
उनकी घड़ी,
मोबायल वैलेट कोई छीने ना छीने, पुलिस जरूर
छीन लेगी। फिर वही थाने की माॅर्निंग वॉक करनी पड़ेगी। उनके दसियों सवालों का जवाब
देना होगा। बार-बार थाने के चक्कर लगाने पड़ेंगे। इससे अच्छा है कि जब ये पुलिस
पार्क से कहीं और डिप्लाॅय होगी तब वॉक कर लेंगे। टांगें सलामत रहें वाॅक भतेरी
हैं।
.
पुलिस वाले भी नित नयी योजनाएं
बनाते रहते हैं कैसे आम पब्लिक को छकाया जाये और कैसे दोनों ओर से कमाई की
जा सके। मोबाइल व चेन छीनने वालों से भी और ये 'हेल्थ-काॅन्शस'
नागरिकों से भी। नागरिक भी सोचने लग पड़ेंगे कि यार हेल्थ तो बाद में
भी देख ली जाएगी पहले तो अपनी जान-माल की सुरक्षा करो। मोटर साइकिल गेंग से और
पुलिस की वेन से। अब अगर पुलिस ये रोज-रोज गुड मॉर्निंग करने लगेगी तो वह चिन्हित
कर लेगी किस को किस केस में फंसाना है। किस पर क्या केस ठोका जाये ताकि जो चुपचाप
मांगो दे जाए और देने के बाद चुप्पी लगाए रखेगा। यह एक तरह से उनका 'फील्ड वर्क' है। प्रोजेक्ट वर्क यू नो!
.
धीरे-धीरे ये हाल हो जाएगा कि लोग बाग गुड
मॉर्निंग सुनते ही काँपने लगेंगे। नर्वस हो जाएँगे। गुड मॉर्निंग का जवाब गुड
मॉर्निंग ही हुआ करता है। गुड मॉर्निंग का जवाब गुड बाई नहीं होता और ना ही गुड
नाइट होता है। आप एक बार कह के देख लें बच्चू ना गुड नाइट हवालात में गुजारनी पड़े।
वो गाना है ना
ज़िंदगी भर न भूलेगी
वो हवालात की रात ...
एक दृष्य मुलाहिजा कीजिये :
एक शान्तिप्रिय दब्बू नागरिक (अब नागरिक है
तो शांतिपूर्ण है और शांतिपूर्ण है तो दब्बू तो
होगा ही )। जैसे ही पार्क के गेट से माॅर्निंग वाॅकर घुसने को हुआ पुलिस की
रौबीली आवाज आई "अरे भई ! इत भी सुन ले! कहाँ दौड़ा जा रहा है ? कोई कांड करके आया है के ? तैने घणी जल्दी मची है!
ये पाँच फुट आठ इंच का आदमी तैने दिक्खे कोई ना ? सरकार ने
हमारी भी कोई ड्यूटी लगा राखी है ? तैने बेरा कोई ना ?"
मॉर्निंग वाॅकर डरते-डरते हाथ जोड़ कर "नमस्ते दरोगा साब"
( वह इतना नर्वस ऑलरेडी हो गया है कि हाथ जोड़े रहा और कॉन्स्टेबल को दरोगा जी कहने
लगा)
कांस्टेबल: "अरे नमस्ते तो ठीक है
! हमारी भी तो गुड मॉर्निंग लेता जा। के
हमारी गुड मॉर्निंग तैने पसंद कोई ना आई ?" अब
मॉर्निंग वाॅकर वाकई भयभीत हो गया। "सुन तैने कोई संदिग्ध सा आदमी नज़र आए तो
मन्ने बताना आखिर हम तेरी सुरक्षा को ही यहाँ मुंह अंधेरे तड़के से ठाड़े हैं। कसम
ले ले ना कोई चाय पी है न कोई नाश्ता नसीब हुआ। मॉर्निंग वाॅकर ने जेब से सौ का
नोट निकाला "हुज़ूर आज तो पॉकेट में इतने ही हैं आप चाय पी लेना"।
"क्यूँ तू न पीएगा ?" "नहीं साब मुझे शुगर है
डॉ ने मना कर रखी है।" "फेर ठीक
है।"
इस प्रकार देखते-देखते पार्क मॉर्निंग वाॅकर
विहीन हो गया। अब ज़मीन तैयार थी। भले इस पर कब्जा करो, प्लॉट काटो, रातों रात बिल्डिंग खड़ी करो। महीने भर
में ही या तो मॉर्निंग वाॅकर्स ने पार्क में मॉर्निंग वॉक बंद कर देंगे या फिर वो
अपने घर की छत पर या अपनी सोसायटी में वॉक करने लग पड़ेंगे। आखिर हेल्थ इज़
वेल्थ। अब वो किसी को भी गुड मॉर्निंग
नहीं बोलते बस मुंह से या तो 'जय श्रीराम' निकलता है 'राम राम सा' निकलता
है या फिर प्रणाम। उनको पता है पुलिस की ये गुड मॉर्निंग बहुत दुख देती है। यह गुड
माॅर्निंग पुलिस के लिए ही गुड मॉर्निंग है उनके लिए नहीं।
गुड नाइट !!