हमारे भारत की भारतीय रेल अब
इन्टरनेशनल हो गई है। बोले तो वर्ल्ड क्लास। क्या पूछते काय में ? काय में क्या ? काय में
इंटेरनेशनल होते हैं। अरे बाबा लुक्स में। टच एंड फील में। विजिबिलिटी में। यहाँ
मैं गाय भैंस के टच की बात नहीं कर रहा हूँ जिसे टच करना नहीं आता और इंजन को ही
पिचका देती है। देखो ! वर्ल्ड क्लास बोले तो थोड़ी स्टाइल, ज्यादा नज़ाकत। नहीं क्या ? तो अगर इंजन या ये वाली वर्ल्ड क्लास रेल नाज़ुक है तो शिकायत कैसी ? खींसे में पैसे हैं तो सफर करो। नहीं तो बस देखो, निहारो और धन्य हो जाओ कि इस जन्म में आप भारत में हो और
उस दौर में हो जहां यह आपको देखने को मिल
गई। वो कहते भी हैं न ‘ब्यूटी इज़ इन दि
आइज़ ऑफ बिहोल्डर’ बोले तो सुं’दरता
देखने वाले की आँखों में होती है’। अब आपकी आँखों में
सुंदरता नहीं रहती तो इसमें रेल का क्या दोष ? अपनी आँखों का
इलाज़ आयुष्मान भारत योजना में कराओ जिन में अच्छे दिन का अक्स रेटिना पर नहीं गिर
रहा। गिर रही है तो बस वन डे भारत की टूटी पिचकी तस्वीर। यहाँ नित नई-नवेली वन डे
भारत इतने भव्य समारोहों में चलाई जा रही हैं। पूरे देश में समारोहों का जाल सा
बिछ गया है। आज यहाँ झंडी दिखा, कल वहाँ, परसों कहीं और। ये सब किसके लिए ? नाशुक्रों
तुम्हारे लिए। अब क्या तुम्हारे पैर धुला-धुला कर इसमें तुम्हें चढ़ाएँ। इतनी आन-बान
शानो-शौकत से ये रेल चलाई जा रही है कि अब तो तुमको लगना चाहिए कि भारत 22 वीं सदी
में है या 23वीं में ? कहीं सीधे 24वीं में तो नहीं पहुँच
गया ? कारण 2024 में चुनाव भी हैं।
जिनकी आँखों में गंदगी है ज़ाहिर है उनकी
आँखों में स्वच्छ भारत अभियान नहीं पहुंचा है और वो इसमें भी कमियाँ निकाल रहे
हैं। देश की इतनी तरक्की को पचा नहीं पा
रहे हैं। इनकी नज़र अब भी फोड़ा-फुंसी पर ही जाती है। अब न जाने कहाँ से कोई फोटोशॉप
करके फोटो ले आए हैं जिसमें लोग-बाग न जाने कौन देश की, कौन ट्रेन में पसरे पड़े हैं, फर्श पर सो
रहे हैं उकड़ूँ बैठे हैं। एक पर एक चढ़े जा रहे हैं। कह रहे हैं ये भारत की है। शर्म
भी नहीं आती कह रहे हैं यही है असली भारत की तस्वीर। हम तुमको अर्श दिखा रहे हैं
तुम हो कि फर्श ही दिखता है तुम्हें, आप लोग विकास डिज़र्व ही
नहीं करते हो। जीवन में तरक्की करो फर्श नहीं अर्श देखो अर्श। अर्श पर आठ हज़ार
करोड़ का भारत के माननीय यशस्वी विश्वगुरु प्रधान मंत्री का विमान देखो। पूरे भारत
का आसमान पर राज है राज। पर तुम्हें थर्ड क्लास फर्श देखने से फुर्सत मिले तब न।
उठो ! इस थर्ड क्लास ट्रेन के थर्ड क्लास डिब्बे के थर्ड क्लास फर्श से। अब तुम
वर्ल्ड क्लास हो गए हो। अरे दीवानों मुझे पहचानो !
वो ट्रेन, वो डिब्बा, वो भेड़-बकरियों की तरह पसरे
बंदे इंडिया के हैं भी या नहीं किसे बेरा ? आजकल फोटोशॉप और
ट्रिक-फोटोग्राफी से क्या नहीं संभव ? हो न हो ये कोई
फेकू-फोटू आई मीन फेक-फोटो है। या तो ये
भारत का है ही नहीं या फिर 2014 से पहले का है।
अब भाई गाय-भैंस ट्रेन से टकरा जाये तो वन डे भारत क्या करे ? पिछले 70 साल में गाय भैंस के परिवार के शिक्षण-प्रशिक्षण पर कोई ध्यान नहीं दिया बस अपने परिवारवाद पर ही लगे रहे। देश का ख्याल था किसे ? अब हमीं को कोई नवीन योजना लानी पड़ेगी 5 किलो अनाज और चावल के साथ 5 किलो घास भी एड करनी पड़ेगी
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