Ravi ki duniya

Ravi ki duniya

Wednesday, December 31, 2025

satire: Indian Politicians' reaction to Epstein file Expose'-- Cold Casual Calculated!!

 

 

1. It is NOT me.

2. This is nothing but Photoshop. The head resembles me, torso is certainly not mine.

3. This is the opposition's stunt.

4. Foreign Hand is there in this. Why just the hand? The legs, the knees all are theirs.

5. This is a conspiracy to weaken and defame India

6. This is New India, India's progress is sore to the eyes of other countries, so this is their Plan I mean conspiracy.

7. I have never been to the United States.

8. I had gone to America, but I did not go to any island.

9. I don't know any Jefferson, only one Jefferson I had read about, but he died a long time ago. Thomas Jefferson.

10. Who is this, Lolita? These tapes are definitely tampered. My wife's name is Lalita.

11. Bro! I do not even have a passport

12. This is the dirty trick of Congress.

13. Our rapid progress is not taken kindly by America. Its nothing but jealousy.

14. I take Aspirin sometimes, but what is this Episteen? Is it a new medicine for headache in the market?

  15. No comments

  16. Elections are coming, so it is the mischief created by my rivals, but you see! they will be humbled.

17. No heat to the glass

18. Lord Rama was also accused, but he had the last laugh. All this is an illusion of demonic powers, but like every time, I will come back unblemished from this circle.

19. I have full faith in the judiciary.

20. If the high command says, I will gladly resign immediately. I have no greed for a chair. For me, the honour of my party is supreme.

21. I am a disciplined soldier of my party.

22. Sexual attraction is a natural instinct; it should not be made public in a cultured country like ours.

23. We have filed a case in the Supreme Court. Because the case is 'sub-judice', it will not be possible to make a statement.

24. This is a body double, not me.

25. I don't know English, how could it be me?

26. I was busy in my constituency during those days, how could I simultaneously be present at two places. Think before speaking.

27. Are you a traitor?

28. Are you a congressman? if not, why are you asking such questions? How could a 'Sanatani' even imagine such a scandalous thing?

29. I will do anything for my motherland when the threat of China was increasing. I once went to the US to explain India's perspective to the World. I knew that I was being recorded, but I kept the country's interest paramount.

30. Children are of purest mind. It is the way of welcoming guests all over the world that children give bouquets. They sing welcome songs. Apart from this, if there is anything else, then it is all the wonder of AI technology. You know how far America is in terms of technology.

31. I am not that good in English language. I had a headache, I asked them for a tablet of Aspirin, till date i fail to understand why they brought this man whose name was similar to Aspirin. I thought he was a Dr. and has prescribed some therapy.

Monday, December 29, 2025

स्किट : स्वयंवर डॉली का

 


 

 

( _प्रस्तुत है सन् 2026 के एक स्वयंवर का दृश्य। स्थान है  एक सांभ्रांत सोसायटी,हरे-हरे जंगलों की हरियाली के बीच आपको तो पता है सावन के अंधे को सब हरा हरा ही दिखता है। सभी पात्र,अपात्र, कुपात्र व्यक्ति अपने आपको  योग्यतम/उपर्युक्त लाइफ पार्टनर बता रहे हैं। कुछ तो कह रहे हैं कि लाइफ पार्टनर ना सही लिव-इन-पार्टनर ही बना लो।ये जान तो वैसे भी जानी है हम एन.सी.आर. के जाँबाज हैं । प्रदूषण से मरना है या डॉली के प्यार रूपी आभूषण से ? लाइफ आपकी .... चाॅइस आपकी_ )

 

[ _दृश्य: नायिका आधुनिक वस्त्रों में पर्स हिलाती-डुलाती चहलकदमी कर रही है। ग्रीनवुड का नायक नंबर वन का प्रवेश_ ]

 

नायक: ( _टाई पहने/ लैपटॉप का बैग उठाए_ )  हाय ! हम शायद पहले मिले हैं ? आप जानी-पहचानी लगती हैं ? मैं ग्रीनवुड में रहता हूँ। मैं कॉर्पोरेट जगत का हैड हौंचो हूं। मैं अनममैरिड हूँ क्या आप मुझे अपना लाइफ पार्टनर बनाएँगी?

 

नायिका:   कुछ अपने बारे में बताइये ? आपने तो सीधे डंडा सा मार दिया!

 

नायक1:   जी हमें कॉर्पोरेट वर्ल्ड में टाइम मैनेजमेंट सिखाया जाता है। बायोमेट्रिक के चलते अब तो एक एक मिनट कीमती है। देखो मैं तुम्हें वर्ल्ड टूर पर साल में दो-तीन बार ले जाया करूंगा। मैंने बहुत से फ्रीकुएंट ट्रेवलर पॉइंट जोड़ लिए हैं। खूब शॉपिंग कराऊंगा। यहाँ तक कि मेरी कंपनी के प्रोडक्ट भी तुम्हें मेक्सिमम डिस्काउंट पर दिलाया करूंगा। वीकेंड पर हम दिल्ली जाकर भी घूम सकते हैं। तुम चाहो तो महीने में दो किटी पार्टी करो, चार किटी पार्टी करो, नो प्राॅब्लम! सोच लो!! आज की तारीख में कॉर्पोरेट वालों की बहुत डिमांड है। आधी ज़िंदगी तो वो टूर या मीटिंगों  में ही बिज़ी रहते हैं अतः तुमको क्या बोलते हैं उसे ‘माई स्पेस’ ‘माई प्राइवेसी’ भी मिल जाया करेगी। प्लीज़ मैरी मी। [ एक्ज़िट ]

 

नायक नंबर 2 का प्रवेश: (कैप लगाए, हाथ में बैटन) जयहिंद ! (सेल्यूट मारता है) मैं फौजी हूँ कोई ऐरा-गैरा सिविलियन नहीं। हमेशा अनुशासन में रहता हूँ। एकदम सफाई पसंद। मुझ से शादी करोगी तो सोचो कितना आराम ही आराम होगा। बैटमैन क्या पूरी बटालियन तुम्हारा हुक्म माना करेगी। हर हफ्ते बड़ा खाना हुआ करेगा। तुम्हें चौका-चूल्हा नहीं करना पड़ेगा। हर चीज़ सस्ती मिलेगी। बस तुम्हें हुक्म करने की देर है। समझ रही हो ना मैं केंटीन की सुविधा की बात कर रहा हूँ।  बस तुम मेरी सी.ओ. बन जाओ ? ( फिर सेल्यूट एक्ज़िट)

 

नायक नंबर 3: का प्रवेश हाथ में डंडा घुमाते हुए देसी अंदाज़ में : मैडम जी विद ड्यू रिस्पेक्ट आई बैग टू से... आई केम टू नो यू वांट टू मैरी। अपनी पूरे इलाके में धाक है जी। जूरीस्डिक्शन की आप फिकर नाॅट। ये सारे माॅल, रेस्टोरेन्ट जहां आप नज़र डालोगे वो आपकी नज़र होगा जी। आप तो यूं सोचो कि आप ही आई.जी., कमिश्नर, सब हो। क्या आदमी, क्या 'लेडिस' सब पर आपका रौब चलेगा, चलेगा क्या दौड़ेगा जी दौड़ेगा। आप जिसे कहोगे उसे उठवा लिया जाएगा वो भी शुक्रवार की शाम को 48 घंटे उसकी ऐसी खातरदारी करेंगे ऐसी खातरदारी करेंगे कि वो आगे से बस कीर्तन सत्संग करता ही दिखेगा। तुम एक बार अपना हाथ मेरे हाथ में देके तो देखो। हाँ आपका वेट गारंटी बढ़ जाना है जी वो आप जानो। अच्छा चलता हूँ। एफ.वाई. आर. भिजवा देना। नहीं समझे? फर्स्ट यस रिपोर्ट।  बरामदगी तो हम करा ही लेंगे (एक्ज़िट)

 

नायक 4: (सूट टाई कैप पाइप में प्रवेश)      आप सब छोड़ो मादाम प्लीज़ मैरी मी। अपने बैचमेट हर स्टेट, हर शहर में हैं वो सब आपकी सेवा में रहेंगे। घोडा-गाड़ी की कभी कमी नहीं रहेगी। जो जरा भी चूँ करेगा उसको वहीं कायदे से समझा दिया जाएगा। ऐसा उलझायेंगे, ऐसे उलझाएंगे कि ज़िंदगी भर सुलझ नहीं पाएगा। बड़ी बड़ी पार्टियों में आप चीफ गेस्ट बनने की अभी से प्रेक्टिस कर लो जी। बूके की लाइने लग जानी हैं। गिफ्ट्स की तो बरसात होने लगेगी। आप तो यूं सोचो कि बिना इम्तिहान दिये आपने तो खुद आई.ए.एस. बन जाना है। आई.ए.एस. बनने का सबसे आसान तरीका-- मैरी एन आई.ए.एस.

सबमिटिड फॉर एप्रूवल प्लीज़ (एक्ज़िट)

 

नायिका:    वाट दि हैल ! आई डोंट वांट टू मैरी। सॉरी !!! !!!

 

Friday, December 26, 2025

व्यंग्य : अरावली हटाने के लाभ

 

       

मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा जब पता चला कि सरकार अरावली की पर्वत श्रंखला को हटा रही है। यह हमारे विकास की पराकाष्ठा है। अज्ञानी लोग विरोध कर रहे हैं। असल में जिन लोगों को पूरी समझ नहीं हैं वही प्रतिरोध कर रहे हैं। उन्हें पता ही नहीं है कि विकास की जल धारा, विकास की नदी कल-कल करती इसी पहाड़ के नीचे से निकलेगी। मसलन, एक बार यह श्रंखला 'लैवल' होते ही आप सोच नहीं सकते कितने लाभ मिलने लग जाएँगे। एक कर्टेन-रेजर/टीज़र/ ट्रेलर प्रस्तुत है:

 

1. वहाँ रेगिस्तान बनते ही अपुन 'दिल्ली डेजर्ट-फेस्टिवल' आयोजित किया करेंगे। सोचो! कितने पर्यटक देसी-विदेशी आएंगे। विदेशी मुद्रा की झड़ी लग जानी है। रोजगार के इतने अवसर खुल जाएँगे। क्या ऊंट की सवारी, क्या लोक नृत्य, क्या लोक गीत, क्या 'बाॅन- फायर'। वाहन, गाइड, होटल, क्यूरिओ, कैब सबको रोजगार मिलेगा।

2. रेगिस्तान की तलहटी पर क्या पता कितना सोना- चांदी, खनिज और तेल के भंडार हमारी प्रतीक्षा कर रहे हैं। हम मालामाल हो जाएँगे। सोने के भंडार ही भंडार होंगे। भारतीयों के घरों में सोने के बर्तन हुआ करेंगे। जिधर देखो सोना ही सोना होगा। आपने 'मॅकेनाज गोल्ड' फिल्म देखी थी न? बस कुछ वैसे ही। तेल-पेट्रोल तो इतना निकलेगा, इतना निकलेगा कि बारह आने लीटर मिला करेगा। उत्पादन इतना होगा कि हम तेल सम्राट बन जाएँगे। तेल-गुरु यू नो ? निर्यात ही निर्यात।

3. गगनचुंबी इमारतें बनेंगी। सबकी हाउसिंग समस्या दूर हो जानी है। मिनिमम 4 रूम सेट सबको लगभग-लगभग यूं ही मिल जाएँगे।

4. पहले हमारा ये इतिहास रहा है कि मांझी जैसे लोग पर्वत काट-काट कर सड़क बनाते थे। अब उन्हें इस तरह का कोई उपक्रम नहीं करना पड़ेगा। चारों ओर टोल, और छह लेन के एक्स्प्रेस वे बन जाएँगे। चारों ओर फ्लाई ओवर और मेट्रो की बहार होगी।

5. दिल्ली वाले अपना प्रदूषण तो भूल ही जाएँ। एक दम खुली हवा आया करेगी चारों ओर से। टैगोर ने कहा था “मैं नहीं चाहता कि मेरा घर चारों ओर से दीवालों से घिरा/बंद रहे। मैं चाहता हूं कि सभी भूभाग की संस्कृति की बयार निर्बाध रुप से चारों ओर से मेरे घर में बहे"

6. मगर क्यों कि टैगोर साब की बात तब मानी नहीं गयी अतः इस पर्वत श्रंखला को ऐसे ही छोड़ दिया और आज देख लो इसकी वजह से आम दिल्ली वालों को कितना प्रदूषण, कितनी गरीबी का सामना करना पड़ रहा है। अंग्रेज़ लोग कलकत्ता से राजधानी इसीलिए दिल्ली लाये थे कि कलकत्ता में पहाड़ नहीं थे और वो अपने इंग्लैंड के पहाड़ 'मिस' करते थे। अब अंग्रेज़ नहीं रहे तो हम क्यों उनकी नकल करें। हम वो करेंगे जिससे हमारे देश का, हरेक देशवासी का विकास हो सके। हमारी मूलभूत आवश्यकता क्या है? जल,जंगल, ज़मीन बस तो ये तीनों हमें एक ही झटके में मिल जाएँगे। पहाड़ जाते ही ज़मीन ही ज़मीन होगी। जहां तक जल की बात है सभी नदियां, पर्वत माला से ही निकलती हैं। कौन जाने अरावली की गोद से भी कोई एक नदी या अनेक नदियां निकल पड़ें। रही बात जंगल की तो जंगल पेड़-पौधों, झाड़-झाड़ी  का हो या कंक्रीट का बात तो एक ही है ना? जंगल तो जंगल है। जो इसका विरोध कर रहे हैं वो सब वो ही लोग हैं जो आजकल कुकुरमुत्तों की तह चैनल-चैनल, अर्बन इंडिया में घुस गए हैं। ये देश की प्रगति नहीं चाहते। सीधे-सीधे बोले तो देशद्रोह का मामला बनता है।

Tuesday, December 23, 2025

व्यंग्य: रसगुल्ला और शादी

 

 

मेरे भारत महान के एक सूबे में एक शादी में रसगुल्ले खत्म हो जाने पर तगड़ा विवाद हो गया। विवाद भी इस हद तक का कि आपको समझाने के लिए इसकी पूरी ए.बी.सी.डी. समझानी पड़ेगी। यह ‘ए’ से आर्गूमेंट्स से शुरू हुआ बोले तो अबे-तबे करने लगे।  फिर ‘बी’ से  बड़बड़ाने लगे, क्या घराती क्या बराती। ‘सी’ से छीना झपटी शुरू हो गई। छीना-झपटी जल्द ही ‘डी’ से धक्का मुक्की में बदल गयी। बस फिर क्या था, कुछ जोशीले लोग जो शाम के लिए '' से इंगलिश वाइन लाये थे उन्होने टेंशन के मारे दिन में ही खोल ली। पीते जाते और गाली गलौज करते जाते तो ‘एफ’ से फाइट चालू हो गयी। अब घराती तो अपनी होम पिच पर खेल रहे थे वे संख्या में कहीं ज्यादा थे। ये क्या बात हुई कि रसगुल्ले जैसी चीज़ को भी बारातियों को तरसना पड़े। लड़की वाले सोच रहे थे कि यह चूक कहाँ कब कैसे हो गयी।  '' से इंगलिश वाइन, 'एफ' से फाइट शुरू हो गई, 'जी' से गुड बाई कहे बिना शादी बारात वापिस।

 

देखिये हमारे हिंदुस्तान में बारातियों को क्या खाना खिलाया गया। खाना कितना लज़ीज़ या कितना खराब था यह बात सालों याद रखी जाती है और इसका ज़िक्र भी किया जाता है। बारातियों की आवभगत एक औसत शादी का महत्वपूर्ण कम्पोनेंट है। मैं ऐसे लोगों को जानता हूँ जिन्होने पहले ही स्पष्ट कर दिया कि उनको दहेज नहीं चाहिए उन्हें तो बस अच्छा खाना और बारातियों की फुल- फुल आवभगत चाहिए। उनकी इज्ज़त का सवाल है।

 

अब इस पसेमंजर में आप ये अदने से रसगुल्ले को देखें। भला ये क्या बात हुई कि साब अभी खाना खुला भी नहीं की आपने या आपके लोगों ने  रसगुल्ले मेन कोर्स की तरह और मेन कोर्स से पहले ही खत्म कर दिये। स्वीट डिश खत्म। खत्म तो खत्म। आपके घराती लोग अपनी प्लेट में आठ-आठ, दस-दस रखे घूम रहे हैं और हमें चिढ़ा रहे हैं ये क्या मज़ाक है? हमारी, हमारे गेस्टों की कितनी बेइज्जती हुई आप अंदाज़ा नहीं लगा सकते। देखिये एक रसगुला कितना हल्लागुल्ला मचा सकता है। इसका नाम भले रसगुल्ला है पर ये अपनी पर आ जाये तो शादी तक तुड़वा सकता है और वो ही हुआ भी। बारात बिन शादी बिन दुल्हन लौट गई।


लड़के वाले जो हिंदुस्तान में अपनी ही ठसक में रहते हैं उनका कहना है कि रसगुल्ला कोई इशू ही नहीं इशू तो ये है कि हमारा अपमान हुआ है। आज ये हाल है कल क्या होगा,? कैसे संस्कार दिये हैं? हो सकता है बहू हमें खाना ही नहीं दे कह दे की खत्म हो गया। जाओ हवा खाओ। भाई अगर रसगुल्ला खत्म हो सकता है तो भोजन क्यों नहीं? यह तो सुघड़ गृहिणी के लक्षण नहीं। इसमें सारा दोष उन लोगों का है जिन्होंने रसगुल्ला को प्रतीक मानते हुए बहुत कुछ कह दिया। ये छीना-झपटी क्या कहती है? क्या बताती है? यह दरअसल पोल खोलती है हमारे समाज की। क्या हम रसगुल्ला के इतने अकाल में रहते हैं। वो रसगुल्ला किस काम का जिसमें रस ही नहीं, जो जीवन में रस ही न भर सके, उल्टा हमारा आपसी साहचर्य और भ्रातृभाव के रस को ही सुखा दे। ये रसगुला हमारा नया दुश्मन है। यह न केवल हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है (डायबिटीज़ वालों से पूछो बेचारे कैसे धो-धो के, निचोड़- निचोड़ के रसगुला खाने को विवश हैं) किन्तु अब तो यह सामाजिक वैमनस्य का सबब बन गए हैं। यह रसगुल्ले के अपने अस्तित्व के लिए कोई मुफ़ीद बात नहीं। मेरा सुझाव है कि रसगुल्ले का या तो बहिष्कार ही कर दें। यदि यह संभव न हो तो दो-दो रसगुल्ले की डिब्बी बना ली जाएँ और उन पर स्लिप से नाम लिखवा दिये जाएँ कि कौन सा डिब्बा किस गैस्ट को दिया जाना है।

 

यूं देखा जाये तो ये स्वीट डिश है ही ऐसी चीज।  नाम तो इसका स्वीट है पर यह जीवन में, समाज में कड़वाहट घोल रही है। आप चाहें आइस क्रीम ले आओ, उस पर भी लोग टूट पड़ते हैं और पूरे साल का 'कोटा' इसी शादी से पूरी करना चाहते हैं। आप गाजर का हलवा ले आओ उसका भी यही हाल करते हैं। क्या घराती क्या बाराती। एक सुझाव ये भी है कि आप स्वीट डिश का एक कूपन दे दो, भैया घूमते हुए जाना और उनके किसी भी शहर के ऑउटलैट से ले सकते हैं। मुझे तो दूल्हा-दुल्हन पर दया आ रही है। उनका क्या दोष? इस रसगुल्ले ने तो उनके जीवन से जैसे रस ही सोख लिया। ये कैसा रसगुल्ला है जी ?

 

Monday, December 22, 2025

व्यंग्य: एपस्टीन फाइल पर भारतीय नेताओं की प्रतिक्रिया

 

1. ये मैं हूं ही नहीं
2. ये फोटोशॉप है। सिर मेरा मालूम देता ज़रूर है। पर मेरा नहीं और धड़ तो डेफ़िनिटली मेरा नहीं
3. ये विपक्ष की चाल है
4. इस में विदेशी ताकतों का हाथ है। बल्कि हाथ ही क्या? पाँव, पीठ, घुटना सब उन्हीं का है।
5. यह इंडिया को कमजोर और बदनाम करने की साजिश है
6. यह न्यू इंडिया है दूसरे देशों से भारत की तरक्की देखी नहीं जा रही अतः यह उनका प्लान आई मीन षड्यंत्र है
7. मैं तो कभी अमरीका गया ही नहीं
8. मैं अमरीका गया ज़रूर था पर मैं किसी आइलेंड पर नहीं गया।
9. मैं किसी जेफरसन को नहीं जानता सिर्फ एक ही जेफरसन के बारे में मैंने पढ़ा था पर वो तो बहुत दिन हुए मर गया थॉमस जैफरसन
10. यह लोलिता क्या होता है ? ये टेप टेंपर की हुई हैं। मेरी धर्मपत्नी का नाम तो ललिता है।
11. मेरा तो भाईसाब पासपोर्ट तक नहीं बना है
12. यह कांग्रेसियों की चाल है
13. अमरीका से हमारी तरक्की देखी नहीं जा रही है। वह हमसे जलता है
14. मैं कभी कभार एस्पिरिन तो लेता हूँ पर ये एप्सटीन क्या है ? कोई नयी दवा आई है मार्किट में?
15. नो कमेंट्स
16. चुनाव आ रहे हैं अतः यह मेरे प्रतिद्वंदियों की शरारत है मगर देख लेना वे मुंह की खाएँगे
17. साँच को आंच नहीं
18. भगवान राम पर भी दोषारोपण हुआ था मगर उनका बाल बांका भी नहीं हुआ। यह सब आसुरी शक्तियों का मायाजाल है किन्तु हर बार की तरह मैं इस चक्रव्यूह से बेदाग वापिस आऊँगा
19. मेरी न्यायपालिका में पूरी आस्था है
20. हाई कमांड कहेगा तो मैं तुरंत त्यागपत्र दे दूंगा। मुझे कुर्सी का कोई लोभ नहीं। मुझे पार्टी की, देश की इज्ज़त ज्यादा प्यारी है
21. मैं अपनी पार्टी का एक अनुशासित सिपाही हूँ
22. यौनाकर्षण एक स्वाभाविक नैसर्गिक क्रिया है इसको इस तरह से प्रदर्शन की भारत जैसे संस्कारी देश में इजाजत नहीं मिलनी चाहिए
23. हमने सुप्रीम कोर्ट में केस डाला है। क्यों कि केस 'सब-जूडिस' है अतः कोई बयान देना संभव नहीं होगा।
24. यह कोई बॉडी डबल है मैं नहीं
25. मुझे तो इंगलिश आती ही नहीं मैं कैसे हो सकता हूँ
26. मैं उन दिनों में अपने निर्वाचन क्षेत्र में बिज़ी था, मैं एक साथ दो जगह कैसे उपस्थित रह सकता हूँ आप खुद अपने दिमाग से सोचो
27. क्या आप देशद्रोही हैं? क्या आप कोंग्रेसी हैं यदि नहीं तो ऐसे सवाल ही क्यों पूछ रहे हैं। कोई सनातनी भला ऐसी कल्पना भी कैसे कर सकता है
28. मैं अपनी मातृभूमि के लिए कुछ भी करूंगा यह तब की बात है जब चीन का खतरा बढ़ रहा था तब मैं एक बार अमरीका गया था। विश्व को भारत का पर्सपक्टिव बताने मुझे पता था कि मेरी रिकॉर्डिंग हो रही है मगर देश को मैं सर्वोपरि रखता हूँ।
29. बच्चे मन के सच्चे। यह पूरे संसार में अतिथि के स्वागत का तरीका है कि बच्चे बुके देते हैं। स्वागत गान गाते हैं। इसके अलावा अगर कुछ भी है तो वह सब टेक्नाॅलाॅजी का कमाल है आपको तो पता ही है कि अमेरिका टेक्नाॅलाॅजी के मामले में कितना आगे है।
30. मुझे उतनी अच्छी अंग्रेजी नहीं आती। मुझे सिरदर्द था मैंने उनसे एस्पिरिन मांगी थी वो पता नहीं क्यूँ इस आदमी को ले आए जिसका नाम एस्पिरिन से मिलता - जुलता था। मैं समझा वह कोई डॉ. है और कोई थिरैपी शिरैपी कर रहा है।

Saturday, December 20, 2025

व्यंग्य: एपस्टीन फाइल और भारतीय

 


हम भारतीय बड़े भुक्खड़ किस्म के लोग हैं। वो क्या बोलते हैं अँग्रेजी में- स्टार्व्ड टाइप। तो सर जी हम तो 'फॉर एवर स्टार्व्ड' हैं। जनम-जनम के भूखे प्यासे। अकालग्रस्त क्षेत्र के लोग हैं हम। भले हम जनसंख्या में दुनिया में नंबर वन हैं। वो अलग कहानी है। तिस पर हम गोरी चमड़ी पर जानो-तन और अपने खाते खाली कराने से लेकर डिजिटल अरेस्ट तक करा लेते हैं। हनी ट्रैप वालों को हम पर ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती। हम तो खुद तैयार ही बैठे रहते हैं।

 

पिछले एक महीने से यू ट्यूब वालों की गहमागहमी देखते ही बन रही थी। हर नयी रील में वो वात्स्यायन से होड़ लेने लगते। जबर्दस्ती के कयास लगाने लग पड़ते थे। उनकी लार टपक रही थी जैसे एपस्टीन की वो पूरी की पूरी फाइल इन्हीं को मिलने वाली है। न जाने किस किस को गद्दी से उतार रहे थे। बस ऐसा समझो एक भभ्भड़ सा मचा रखा था। हर यू ट्यूबर बताता होता था कि कितने भारतीय इस सूची में हैं किस किस के फोटू निकल कर आएंगे। तब तक बेचारे कभी कहते एक खिलाड़ी है, एक मंत्री है, एक उद्योगपति है आदि आदि अब इनसे कोई पूछे कि अन्यथा क्या आप यूं कहेंगे कि एक एम.टी.एस. है। एक बाबू है जो आठवें वेतन आयोग का इंतज़ार करते करते लोलिता वाली फ्लाइट पकड़ देश छोड़ गया। या परेल  का परचून वाला था और डोंबिवली का पंसारी था। अब इनसे भी भला कोई खबर बनती है। खबर बनाए रखने को तो बड़े बड़े नाम ही दरकार होते हैं। फिर भले आप बस छुआ भर दें कि एक क्रिकेटर है (चलो स्पोर्ट्स कोटा आ ही गया) एक मंत्री है, एक संतरी है।

 

जिनके नाम नहीं आए मुझे तो उनका ताज्जुब हो रहा है।, फिल्म लाइन से निल बटा सन्नाटा। कॉर्पोरेट जगत का क्या हुआ? विपक्ष का क्या सीन है। अब ये न कह देना कि आप या एपस्टीन उन्हें इस लायक ही नहीं समझते। लोग तो कब से सांस रोक कर इंतज़ार कर रहे थे कि बड़े बड़े मंत्री लपेटे में आएगे। बम्पर वेकेन्सी हो जाएंगी। वेकेन्सी ही वेकेन्सी एक बार एपस्टीन के आइलेंड पर दिख भर जाएँ आप।

 

फिर जैसा कि होना था। सब ओर निराशा का वातावरण छा गया। ये क्या ? किसी भारतीय की गंदी क्या अच्छी तस्वीर भी सामने नहीं आई। सब फेल कर गये। फिर वो लगभग खीझते हुए अमेरिका पर ही फोकस कर पृथ्वी पर भूकंप, सियासत में बवंडर लाने की गारंटी देते रहे चौबीस घंटे में वो सुनामी भी थम गई।

 

बस इतना है, अच्छा खासा वक़्त कटा। एक रोमानी से सुरूर में पूरा देश एक महीने से फेंटेसी में जी रहा था। तंद्रा टूट गयी। अभी आप जानते ही नहीं। हमने पनामा पेपर का क्या हाल किया था। उसे वैसे ही मसल दिया था जैसे पनामा सिगरेट पी कर मसल देते हैं। आपने वो मशहूर शेर सुना ही होगा:

 

                   क्या तब्ख़ मिलेगा गुल-फ़िशानी कर के

                   क्या पाएगा तौहीन-ए-जवानी कर के

                  तू आतिश-ए-दोज़ख़ से डराता है उन्हें

                  जो आग को पी जाते हैं पानी कर के

 

 

Thursday, December 11, 2025

बुनती ज़िंदगी

अज़ब डिजाइन का मेरा स्वेटर 

बुनती ज़िंदगी

हरेक सीधे के बाद दो फंदे उल्टे 

बुनती ज़िंदगी

देखती रहती है ! जो कहा नहीं वह 

सुनती ज़िंदगी 

मुझमें खामिया हज़ार मुझे कब इनकार

काश उधेड़ कर मुझे फिर से 

बुनती ज़िंदगी