किशोर कुमार जी का एक लोकप्रिय गीत है “मैं हूँ झुम-झुम-झुम झुमरू फक्कड़ घूमूँ बन के घुँमरू...” बस मैं भी कुछ इसी तर्ज़ पर कंप्रोमाइज्ड हूँ।
यह एक पॉज़िटिव कांसेप्ट है। पहले कंप्रोमाइज़ होने को/कंप्रोमाइज़ करने को अच्छा
माना जाता था। पता नहीं कब में यह निगेटिव हो गया। जब आप कहते हैं “प्यार बांटते
चलो... हो... क्या हिन्दू क्या मुसलमान सब हैं भाई भाई। इस
में भी इसी कंप्रोमाइज़ की बात कही गयी है।
कंप्रोमाइज़ की महिमा बताई गयी है।
पता नहीं ये बावेला
क्यूँ मचाया हुआ है। फलां कमीशन कंप्रोमाइज़ है...ढिकानी एजेंसी कंप्रोमाइज़ है। भाई
आप अपनी बताओ? यह देश-काल के अनुरूप शब्द अपने अर्थ बनाते-बिगाड़ते रहते
हैं। अब देखो एक शब्द है 'राजीनामा',
हिन्दी में इसका अर्थ है सहमत होना, कुट्टी
खत्म और अब्बा हो गयी। लेकिन मराठी में इसका अर्थ है त्यागपत्र दे देना। अतः ऐसा
ही कुछ इस टर्म के साथ है। कंप्रोमाइज़ हो
जाने को हाथों हाथ ले लेना चाहिए था। क्या पति-पत्नी कंप्रोमाइज़ नहीं करते। क्या
मित्र लोग आए दिन नाराज़ होते और
कंप्रोमाइज़ नहीं करते। ये इंग्लिस में कुछ तो लोचा है। लड़ाई हो जाये। तलाक़ का
मुकदमा दायर कर रखा हो तो अगर कंप्रोमाइज़ हो जाये तो कितनी खुशी होती है। चलो जी
कंप्रोमाइज़ हो गया। कोर्ट भी बढ़ावा देते हैं कि आउट ऑफ कोर्ट ही
कंप्रोमाइज़/सेटलमेंट हो जाये। उनका एक केस कम हो जाएगा। हम बच्चे थे तब भी कहा
करते थे लड़ाई-लड़ाई माफ करो कुत्ते की .... यह क्या है ? यह
और कुछ नहीं महज़ कंप्रोमाइज़ है।
मैं अपने आपको कंप्रोमाइज़्ड मानता हूँ। दूसरों की
मदद को सदैव सहर्ष तैयार रहता हूँ। कोई गाइडेंस मांगे मैं जेनुइन सलाह देता हूँ।
कोई पूछे तो किसी भी विषय के इंपोर्टेन्ट सवाल ‘ऑफ-हेंड’ बता देता हूँ। किसी का भी
किसी भी परीक्षा के लिए 'मेंटर' बनने को राज़ी हूँ। ठीक-ठाक लिख-लिखा लेता हूँ। पता नहीं
लोग ये क्यूँ कहते हैं कि सरकार और देश दो अलग अलग चीज़ें हैं। अगर ऐसा है तो जब भी
सरकार के विरुद्ध कोई धरना/प्रदर्शन होता है नुकसान अंग्रेजों के ज़माने से देश की
संपत्ति का ही करते आए हैं। जैसे रेल / रेल की पटरी/ थाना जला देना/ पोस्ट ऑफिस
लूट लेना। वाहनों की तोड़ फोड़ करना। ये सब देश के ‘असेट’ हैं न कि किसी सरकार विशेष
के। कहनेवाले सी.बी.एस.ई. को भी कंप्रोमाइज्ड बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन कहने लग
पड़े हैं। रही बात ‘नीट’ की,
(नेशनल एलिजिबिलिटी-कम- एंट्रेस
टैस्ट' में कहीं
कंप्रोमाइज़ नहीं आता है। अत: 'सी' से
कॉकरोच आया है। 'सी' से कॉकरोच 'सी' से
कंप्रोमाइज़। यह ऐसी कोई खराब बात भी नहीं। आप जान नहीं रहे हैं, सच
तो ये है हम सब कंप्रोमाइज्ड हैं, पाॅश्चराइज़्ड हैं, फाॅसिलाइज़्ड
हैं।
शेक्सपियर ने लिखा
है:
"एज़ फ्लाईज़ टू वान्टन बाॅयज़ आर वी टू दि गाॅड्स, दे किल अस फाॅर देयर स्पोर्ट"
(जैसे शरारती लड़कों के लिये मक्खियां होती हैं वैसे ही देवताओं के लिये हम हैं; वे अपने मनोरंजन के लिए हमें मार डालते हैं)
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