Ravi ki duniya

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Sunday, June 14, 2026

संस्मरण: टूटत टूटत पुनः - विक्टोरिया मैस-शास्त्री-कर्तव्य भवन

  


यह बात सन 1960 के आसपास की होगी। जहां शास्त्री भवन खड़ा है तब उस रोड का नाम डॉ राजेन्द्र प्रसाद रोड नहीं था बल्कि विक्टोरिया रोड था। जहां शास्त्री भवन बना वहाँ बैरक्स थीं और नाम था विक्टोरिया मैस। तब इस इलाके मेन तीन मैस हुआ करतीं थीं। एडवर्ड मैस जहां निर्माण भवन आदि बने, वह रोड भी तब एडवर्ड रोड कहलाती थी। कालांतर में उस रोड का नाम बादल कर मौलाना आज़ाद रोड कर दिया गया कारण मौलाना आज़ाद उसी रोड के एक बंगले में रहते थे जहां फिर विज्ञान भवन बना। विक्टोरिया मैस आपको बता चुका हूँ जहां डिफेंस के कुछ दफ्तर/रिहायशगाह थी। इसी पर आगे चल कर डॉ राजेन्द्र प्रसाद रोड पर ही सेंट्रल विस्टा मैस थी। वहाँ भी बैरक्स थीं। तीन-चार शोप्स भी थीं। जो परचून की हलवाई की और एक मीट की दुकान थी। एक साइकिल रिपेयर शॉप भी थी।

 

तब 15 जनपथ के दी टी यू बस स्टेंड का नाम विक्टोरिया मैस हुआ करता था। जनपथ और डॉ राजेंद्र प्रसाद रोड की जो क्रॉसिंग है वहाँ पहले एक गोल चक्कर (राउंड एबाउट) हुआ करता था जिसके अंदर घास हुआ करती थी। इसी क्रोस्स सेक्शन पर दो पान वाले और दूसरी टरग एक मोची बैठा करता था। जनपथ वाली साइड पर एक तरफ बहुत से नाई अपनी सन्दूकची लेकर बैठे रहते थे तो दूसरी ओर एक अच्छा खासा टेकसी स्टेंड हुआ करता था। सन 1960 की आसपास की ही बात है मुझे प्री स्कूल बोलो के जी बोलो में दाखिल कराया गया था। वह स्कूल एक कमरे में 1एसटी फ्लोर पर चला करता था। अज़ाब रिवाज था उसमें या कह लो अभी देश आज़ाद हुए बहुत साल नहीं हुए थे क्लास के मुहाने पर एक क्लास का बालक खड़ा रहता और टीचर के आता देख ज़ोर से पुकारता “क्लास स्टेंड अप” इस पर क्लास अपनी अपनी जगह खड़ी हो जाती और पूरे जोश से बोलती “ जयहिंद” एक बार क्लास्स स्टेंड अप कहने की मेरी भी बारी आई थी। तीस पर टीचर ने मुझे गोद में उठा प्यार किया था। ये किस्सा मैंने विधिवत घर आकार माता जी को सुनाया था। अभी ज्यादा दिन नहीं हुए थे की घोषणा कर दी गयी की यह स्कूल शिफ्ट हो रहा है। बस फिर क्या था देखते-देखते विक्टोरिया मैस टूटने लगा और फिर शास्त्री भवन बन कर तैयार हुआ। वहाँ पर पहली बार सतीश गुजराल जी का मुराल देखने को मिला। स्कूल शिफ्ट होकर सतीश कुमार या चंद सांसद जी के बंगले में 2 रायसीना रोड पर आ गया। बंगले में अंदर नहीं बल्कि बंगले के बरामदे और लोन में। क्लास चलाने लगीं। जब सतीश कुमार/चंद चुनाव हार गए तो यह स्कूल जा पहुंचा उसके पीछे धोबीघात के इलाके में। फिर वहाँ से भी जल्द ही विस्थापित कर दिये गए क्यों की वहाँ दिल्ली सरकार के ग्लाइट बनाने लग पड़े थे। अब वहाँ आदित्य सदन खड़ा है। आदित्य जी से मुराद षड दिल्ली के उप-राज्यपाल से रही। यह स्कूल वहाँ से शिफ्ट हो कीलिङ्ग लें में आया वह भी एक पार्क में टेंट में। बस तब मैंने और मटा पिता अदोनों ने समवेत स्वर में तौबा कर ली। अतुल ग्रोव रोड पर पी एंड टी प्राइमरी स्कूल था। हाम्रा दाखिला वाहा करा दिया गया था। तब हम तीन भाई उसमें जाने लगे। मैं सीधा फोर्ट स्टैंडर्ड में, जबकि मैंने केवल दूसरी जमात पास की थी। गो की तीसरी क्लास कभी गए ही नहीं। छोटा भाई शायद दूसरी क्लास में था और उससे छोटा शायद के जी टाइप।

 

डॉ राजेन्द्र प्रसाद रोड पर लोकप्रिय सांसद  तारकेशवरी सिन्हा रहा करती थीं। जनसंघ के नेता दीनदयाल उपाध्याय भी डॉ राजेंद्र प्रसाद रोड पर ही रहा अरते थे। यूं डॉ राजेन्द्र प्रसाद रोड पर जगजीवन राम, मोरारजी देसाई और एस के पाटील भी रहे। साथ ही सी वी सी का ऑफिस और निर्वाचन आयोग भी बहुत दिनों तक डॉ राजेन्द्र प्रसाद के ही एक बंगले से संचालित हुआ था। इस रोड से पैदल चल कर या बाद में साइकिल पर चल कर हैदराबाद हाउस मटन लेने जाते थे। वहाँ मटन की एक दुकान थी।

 

जब सुना शास्त्री भवन टूट रहा है और अब वहाँ कर्तव्य भवन की शाखा खुलेगी तो अनायास ही याद हो आया...ओल्ल्द ऑर्डर छेंजेस गिविंग वे तो न्यू। पृत्वी वही है आदमी अपने अपनी ज़रूरियात और फेनसी के कारण बनाता-तोड़ता-बनाता रहता है और खुश होता रहता है। वह मालिक समझने की भूल करता रहता है हर युग में और इतनी सी बात समझ नहीं लगती की हम सब किरायेदार हैं वो एक शेर है ना :

 

                               अपनी तो उससे यारी है

                               जिसकी दुनिया सारी है

 

( अब डॉ राजेन्द्र प्रसाद के एक हिस्से में नेशनल आर्काइव का बड़ा दफ्तर खुल गया है पहले केंद्रीय सचिवालय को बड़ा दफ्तर कह बुलाया जाता था। जहां बाबू जगजीवन राम, मोरारजी देसाई और एस के पाटिल रहे थे वह और सेंट्रल विस्टा पहले ही कर्तव्य भवन बन गए  हैं । पी. एंड टी. स्कूल प्राइमरी से टेन प्लस टू बन गया है। यूं जब हम पी.एंड टी. में पढ़ते थे तब ही किदवई भवन और खुर्शीद लाल भवन बने थे।)

 

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