Ravi ki duniya

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Tuesday, June 16, 2026

व्यंग्य : ईसबगोल सिविल सर्विस कोचिंग


 

कहते हैं कोचिंग में अंधा पैसा है। पता नहीं ऐसी खबरें कौन चला देता है। लेकिन आप नज़र दौड़ाएंगे तो पाएंगे ये बिलकुल असत्य भी नहीं। किसी एक पॉइंट पर ये तय पाया गया था कि भारत के विशाल क्षेत्रफल और आबादी को देखते हुए अब यह वक़्त आ गया है कि दो आधारभूत क्षेत्रों में प्राइवेट उद्यमशीलों की मदद ली जाये। फिर क्या था 'खुल जा सिम सिम' का यह मंत्र सुन कर दो क्षेत्र उद्योगपतियों के लिए खोल दिये गए। वह थे स्वास्थ्य और शिक्षा। एक रुपये के टोकन मूल्य पर ज़मीन ली गयी अपने चार्टर में बड़े बड़े वायदे किए गए। हम ग़रीबों के इलाज़ के लिए सौ बेड सुरक्षित रखेंगे। नि:शुल्क। स्कूल में ग़रीबों का अलग कोटा होगा ताकि कोई ग़रीब तालीम से महरूम ना रह जाये।

 

यह सुन व्यापार जगत में हलचल मच गयी। ना कुछ आयात करना है ना निर्यात। ना मार्किट के आम जोखिम का सामना। वे सब डॉ की नकली डिग्री ले इस क्षेत्र में कूद पड़े। आप पाएंगे कि अस्पताल हो या स्कूल/यूनिवर्सिटी किसी न किसी उद्योगपति के नाम से जुड़ी हैं। उनके आदर्श भयंकर रूप से उच्च हैं मसलन देश को पूरा का पूरा शिक्षित करना है। अथवा सभी को स्वास्थ्य देना है। फिर क्या था दनादन स्कूल/यूनिवर्सिटी खुलने लग पड़े। एक-एक शहर में अनेक प्राइवेट हॉस्पिटल खुल गए। पाँच सितारा होटल और अस्पताल का जैसे समागम हो गया। आप बता नहीं सकते ये होटल की लॉबी है या अस्पताल की। इसमें एक ही समस्या थी ग़रीब जो है सो शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों से दूर...दूरतर...दूरतम होता चला गया। निजी संस्थान उठते चले गए और सरकारी गिरते चले गए। कहावत हो गयी एक जगह आप जान से जा सकते हो दूसरी जगह जायदाद से। इलाज़ और मेडिकल सुविधा इतनी महंगी हो गयी कि लगता है आज के दौर में तो माता-पिता हम को पढ़ा ही नहीं पाते। पढ़ा क्या दाखिला ही नहीं करा पाते। हमें भी बड़े होकर कहीं से डिग्री का जुगाड़ करना पड़ता।

 

कुछ नए नए सिविल सर्विस कोचिंग संस्थान जो जल्द ही मार्किट में आने वाले हैं:

 

1. दादा छाप ज़र्दा सिविल सर्विस कोचिंग

2. जलजीरा सिविल सर्विस कोचिंग

3. ग्रीन चिली सिविल सर्विस सेंटर

4. सनातन आई.ए.एस. केंद्र

5. बॉलीवुड अकेडमी ऑफ आई.ए.एस.

6. प्रेस्टीज़ पुलिस कोचिंग अकादमी

7. हिन्दू आई.ए.एस. केंद्र

8. एन.डी.एच. कोचिंग

9. भालू छाप के.डी. (काला दंतमंजन) कोचिंग

10. फफोला रिफाइंड अकादमी ऑफ आई.ए. एस.

आप यकीन रखें मार्किट में बच्चों की कमी नहीं है। 'ऑफ लाइन' हो गया, 'ऑन-लाइन' हो गया। अब क्या बचा? अभी बचा है:

 “हमारा अपना सैटेलाइट (उपग्रह) है”

"हमें पेपर लीक कराने का दस साल का तजुर्बा है"।

हमारे गैस पेपर 80% सही निकलते हैं”

अब तक हमारी अकादमी के हज़ार स्टूडेंट्स ऑलरेडी सलेक्ट हो कलेक्टर/ एम्बेसडर/ कमिश्नर लगे हुए हैं। 'कैच दैम यंग' स्कीम के अंतर्गत अब बच्चों को प्राइमरी कक्षा से अकेडमी ही पढ़ाएगी। आप कोटा के इंजिनयरिंग मॉडल से वाकिफ हैं। वे भी बच्चों को आठवीं दसवीं में ही ले जाते हैं। नयी नयी सुविधाएं आएंगी। "हम हॉस्टल में शुद्ध खाना देते हैं"। "हमारे यहाँ सातों दिन नॉन वेज बनता है"। हमारे यहा एक एंटे रूम में आप चाहें तो अपने परिजन/गर्ल फ्रेंड/बॉय फ्रेंड को रख सकते हैं। ये पूरा पैकेज है। मार्किट निसंदेह बहुत ब्राइट और प्राॅमिजिंग है।

  

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