Ravi ki duniya

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Tuesday, January 12, 2010

व्यंग्य:उमर छियासी आत्मा प्यासी



नेताजी ने कहा है कि राष्ट्रपति बनने वास्ते उनकी छियासी की उम्र आड़े नहीं आएगी। आखिर छियासी है क्या? महज़ एक एक...सॉरी दो अंक। एक आंकड़ा सिर्फ एक नम्बर। रे भैया! दिल में झांको, आत्मा में देखो मेरे देशभक्ति के जजबातों का वलवला देखो। ये बर्थ 'साटीफिकिट' देखने की तुमसे किसने कही है? रे बावलो! देशभक्ति की, देश सेवा की उमर कोई नहीं होती। लोग मरते दम तक देश सेवा करते हैं। एक बार श्रीयुत नेता जी ने चुटकी ली थी :

ये माना मैं तेरी दीद के काबिल नहीं

तू मेरा शौक देख, तू मेरा इंतजार देख'



तो नेताजी मैं आपसे छियासी के छियासी प्रतिशत सहमत हूँ कि आखिर ये उमर सुमर होती क्या है? मुझे तो एक बात पता है,किस चीज का इलाज नहीं है आज की दुनियां में। मोतियाबिन्द उतर आया,चलो लैंस गिरवा लो आंखों में और ऐसे कज़रारे कज़रारे जुड़वाँ नैना ले लो कि शहरवाले क्या देशवाले बरबाद हो जाएं। क्या कैन्सर, क्या हार्ट टैक, क्या डायबिटीज, क्या ब्लड प्रैशर। रॉड, नट, स्क्रू, बोल्ट सभी तो डॉक्टर हाल बदल देते हैं। टमीटक,लिपोसक्शन, नाक, कान, गाल, गाल के डिंपल, होटों की लाली, मुस्कान क्या नहीं है, मेरे और मेरे डॉक्टर के पास। एक ये जाहिल पत्रकार हैं जो जब पूछेंगे टेढ़े और ऊटपटांग सवाल पूछेंगे। अब भला ये भी कोई सवाल हुआ कि क्या आपकी उमर राष्ट्रपति बनने में आड़े आएगी? नहीं...नहीं...कभी नहीं राजेश खन्ना का वो गाना इन्होंने सुना ही कोई नही :



दिल को देखो चेहरा न देखो......



नेताजी आप संघर्ष करो हम आपके साथ हैं। (कम से कम मैं तो हूँ ही) राष्ट्रपति भवन की चारदीवारी, परकोटे बग्घी, अंगरक्षकों की पंक्तियां हमें बुला रहीं हैं। हमारी जाति, हमारे प्रदेश से यूँ भी राष्ट्रपति आज तक बना भी कोई नहीं। ये उम्र का सवाल कमजोर, कामचोर, बेदिमाग वाले उठाते हैं। शार्ट में मैं बोलूं ये देशभक्त कोनी। देश के लिए तन, मन, धन जान-माल सब वारि वारि है। धरती वीरों से खाली हो गई है क्या, न....न... कतई नहीं।



नेताजी मेरी तो एक ही अरज़ है। मैं दफ्तर में बाबू हूँ। सभी कहन लग रहे हैं कि अगले महीने साठ लगते ही मुझे रिटायर कर घर भेज देंगे। मैंने भतेरी कहा है कि भई उमर आड़े क्यूँ ले रहे हो। वो तो मेरी सुन ही नहीं रहे। मुझे साठ पे जबरन रिटायर कर ‘पिंशन' देने पे तुले हैं। दुश्मन कहीं के। हुकम ! तनिक मेरे दफ्तर में भी कह छोड़ो न कि ये अपने गाँव का ही छोरा है...। अभी तो छियासी में मेरे घणे सारे साल बकाया हैं।


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